नई दिल्ली. सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत ढहने के बाद दूसरे दिन भी राहत और बचाव अभियान बेहद सावधानी के साथ जारी है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि अब तक कुल 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। इनमें से 6 लोगों को मृत घोषित किया गया, जबकि 5 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक शव अभी मलबे के भीतर है, जिसे बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ और अग्निशमन दल की टीमें लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती मलबे को इस तरह हटाना है कि यदि कोई व्यक्ति जीवित अवस्था में भीतर फंसा हो तो उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
कितने लोग दबे हैं, इसकी पक्की जानकारी नहीं
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि दुर्घटना के समय इमारत के भीतर कुल कितने लोग मौजूद थे। एनडीआरएफ के अनुसार फिलहाल मलबे में दबे लोगों की कोई निश्चित संख्या उपलब्ध नहीं है। घटनास्थल पर बचाव दल मलबे की परतों को हटाते हुए संभावित स्थानों की तलाश कर रहे हैं। शुरुआती घंटों में बड़ी संख्या में लोगों के भीतर फंसे होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन अधिकारियों ने अब तक इसकी कोई अंतिम संख्या घोषित नहीं की है। ऐसे में बचाव अभियान पूरा होने तक किसी निश्चित आंकड़े पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
सूचना मिलते ही सक्रिय हो गई सरकारी मशीनरी
एनडीआरएफ महानिरीक्षक ने बताया कि रविवार दोपहर इमारत गिरने की सूचना मिलते ही सरकारी तंत्र सक्रिय हो गया था। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुलिस, अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़े दल मौके पर पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकीय दलों ने भी राहत अभियान में सहयोग किया। स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों ने भी शुरुआती बचाव प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एनडीआरएफ की 2 तकनीकी टीमें घटनास्थल पर तैनात हैं और मलबे को हटाने तथा भीतर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश का काम लगातार चल रहा है।
रातभर चला अभियान, मलबा हटाने में बरती जा रही अत्यधिक सावधानी
बचाव अभियान के दौरान सबसे बड़ी चिंता आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर भी बनी हुई है। बचावकर्मी भारी मलबे को हटाते समय यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अभियान के दौरान कोई अतिरिक्त ढहाव न हो। भारतीय एक्सप्रेस की घटनास्थल से रिपोर्ट के अनुसार, समीप स्थित छात्रावास की संरचना को भी संभावित जोखिम को देखते हुए बचाव दल के सामने अतिरिक्त चुनौती बनी हुई थी। इसी कारण कई हिस्सों में मशीनों के इस्तेमाल और मलबा हटाने की प्रक्रिया को बेहद नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया गया।
इमारत में मरम्मत का काम बना जांच का अहम बिंदु
हादसे की प्रारंभिक पड़ताल में इमारत के तहखाने में चल रहे मरम्मत कार्य और पानी जमा होने को महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को बताया कि शुरुआती जानकारी में तहखाने में पानी जमा होने और पुरानी इमारत में चल रहे मरम्मत कार्य के बीच संबंध सामने आया है। हालांकि हादसे के अंतिम कारण की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी। पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है और प्रशासनिक स्तर पर भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
6 मौतों के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में छात्र आवास और किराये पर चल रहे निजी भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह इमारत विद्यार्थियों के रहने के लिए उपयोग की जा रही थी और इसके भीतर मरम्मत का काम भी चल रहा था। हादसे के बाद भवन की संरचनात्मक मजबूती, निर्माण और मरम्मत की अनुमति तथा अग्नि और भवन सुरक्षा मानकों के पालन की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। दिल्ली सरकार ने आसपास के जोखिम वाले भवनों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है।
बचाव अभियान पूरा होने तक आंकड़ों पर बनी रहेगी नजर
फिलहाल प्राथमिकता मलबे में किसी भी संभावित जीवित व्यक्ति तक पहुंचने और सभी शवों को सुरक्षित बाहर निकालने की है। एनडीआरएफ ने स्पष्ट किया है कि मलबे में दबे लोगों की संख्या अभी निर्धारित नहीं है, इसलिए अभियान पूरा होने से पहले संभावित मृतकों या लापता लोगों का अंतिम आंकड़ा सामने आना मुश्किल है। प्रशासन प्रभावित परिवारों के संपर्क में है और बचाव दल लगातार मलबे के उन हिस्सों की जांच कर रहे हैं जहां किसी व्यक्ति के फंसे होने की आशंका हो सकती है।