अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर महीनों तक फंसे रहे मिशन के बाद नासा की वरिष्ठ अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने आधिकारिक रूप से सेवानिवृत्ति ले ली है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया कि उनकी सेवानिवृत्ति का आदेश दिसंबर के अंत से प्रभावी हो चुका है। इसके साथ ही अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में एक स्वर्णिम अध्याय का समापन हुआ।
स्टारलाइनर मिशन: योजना से कहीं लंबा सफर
सुनीता विलियम्स वर्ष 2024 में बोइंग के नए ‘स्टारलाइनर’ कैप्सूल की परीक्षण उड़ान के तहत अंतरिक्ष स्टेशन गई थीं। यह मिशन केवल एक सप्ताह का था, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते यह नौ महीने से भी अधिक लंबा खिंच गया। अंततः वे मार्च में सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटीं, जिससे यह मिशन नासा के इतिहास में विशेष रूप से दर्ज हो गया।
608 दिन अंतरिक्ष में, रिकॉर्डों से भरा करियर
नौसेना की पूर्व कप्तान और 60 वर्षीय सुनीता विलियम्स ने नासा में 27 वर्षों से अधिक समय तक सेवाएं दीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के तीन मिशनों में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। यह उपलब्धि स्वयं में उनके धैर्य, तकनीकी दक्षता और मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है।
स्पेसवॉक की बेजोड़ उपलब्धि
सुनीता विलियम्स ने एक महिला द्वारा सबसे लंबे समय तक अंतरिक्ष में चहलकदमी करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने कुल 62 घंटे स्पेसवॉक की, जो उन्हें इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर विशिष्ट स्थान दिलाता है। यह रिकॉर्ड न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि महिला अंतरिक्ष यात्रियों की क्षमता का भी सशक्त संदेश देता है।
नासा की ओर से सम्मान और सराहना
नासा के नए प्रशासक जैरेड आइजैकमैन ने सुनीता विलियम्स को “अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में अग्रणी” बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सेवानिवृत्ति नासा के लिए गर्व और सम्मान का क्षण है। यह सम्मान उनके समर्पण और नेतृत्व को दर्शाता है।
स्टारलाइनर का अगला कदम
बोइंग का अगला स्टारलाइनर मिशन अब मानव रहित होगा और केवल माल को अंतरिक्ष स्टेशन तक ले जाएगा। नासा का उद्देश्य है कि थ्रस्टर और अन्य तकनीकी समस्याओं को पूरी तरह सुलझाने के बाद ही किसी अंतरिक्ष यात्री को इस कैप्सूल से भेजा जाए। यह परीक्षण उड़ान इसी वर्ष प्रस्तावित है।
भारतीय जड़ों से वैश्विक पहचान तक
सुनीता विलियम्स के पिता दीपक पांड्या गुजरात मूल के जाने-माने तंत्रिका विज्ञानी थे, जबकि उनकी मां उर्सुलीन बोनी पांड्या स्लोवेनियाई-अमेरिकी मूल की हैं। भारतीय विरासत और अमेरिकी वैज्ञानिक परंपरा के संगम ने सुनीता विलियम्स को वैश्विक प्रेरणा का प्रतीक बना दिया।
प्रेरणा बनकर रहेंगी सुनीता
सुनीता विलियम्स की विदाई केवल एक सेवानिवृत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा की अमिट विरासत है। अंतरिक्ष में उनके साहसिक कदम, रिकॉर्ड और समर्पण उन्हें हमेशा इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में जीवित रखेंगे।
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