नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुए लगभग 92 प्रतिशत मतदान को लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बताया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का मतदान करना यह दर्शाता है कि नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह टिप्पणी विशेष मतदाता सूची संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आई।
न्यायाधीशों ने जताई संतुष्टि और खुशी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल थे, ने मतदान प्रतिशत को लेकर संतोष व्यक्त किया। न्यायालय ने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में इतने बड़े स्तर पर मतदान देखना खुशी का विषय है। जस्टिस बागची ने भी यह उल्लेख किया कि कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा, जो एक सकारात्मक संकेत है।
प्रवासी मतदाताओं की भागीदारी बनी अहम कारण
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कल्याण बनर्जी ने तर्क दिया कि रिकॉर्ड मतदान का एक प्रमुख कारण प्रवासी मजदूरों की वापसी भी रही। उन्होंने कहा कि कई लोग अपने नाम मतदाता सूची से हटने के डर से मतदान के लिए राज्य लौटे। इस पर न्यायालय ने इसे भी लोकतंत्र की जागरूकता का संकेत मानते हुए सकारात्मक दृष्टि से देखा।
वोट की ताकत को समझने की जरूरत
मुख्य न्यायाधीश ने इस अवसर पर नागरिकों को अपने वोट के महत्व को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब बड़ी संख्या में लोग मतदान करते हैं, तो हिंसा की संभावनाएं स्वतः कम हो जाती हैं और यह दर्शाता है कि जनता अपनी शक्ति को पहचानती है। लोकतंत्र में वोट ही सबसे बड़ा माध्यम है, जिससे जनता अपनी आवाज को सशक्त तरीके से व्यक्त कर सकती है।
तमिलनाडु में भी उच्च मतदान बना उदाहरण
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी परंपरागत रूप से उच्च मतदान प्रतिशत देखने को मिलता है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। जस्टिस बागची ने कहा कि मतदान लोकतंत्र का मूल आधार है और इसे सुरक्षित तथा सम्मानित बनाए रखना बेहद आवश्यक है, अन्यथा लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर हो सकती है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक भूमिका की सराहना
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत में कहा कि 92 प्रतिशत मतदान ऐतिहासिक है और सुरक्षा बलों ने हिंसा को नियंत्रित करने में प्रभावी भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में पहले चुनावों के दौरान हिंसा का इतिहास रहा है, लेकिन इस बार स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जो प्रशासनिक तैयारियों का परिणाम है।
सुनवाई के दौरान हल्का विवाद भी सामने आया
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर कुछ मतभेद भी देखने को मिले। जस्टिस बागची द्वारा चुनाव आयोग की सराहना किए जाने पर कल्याण बनर्जी ने असहमति जताई और कहा कि अन्य न्यायालयों में आयोग की आलोचना हो रही है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने आपत्ति जताई और आरोपों को गलत बताया। स्थिति को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से सुनवाई समाप्त करने का अनुरोध किया, ताकि मामला अनावश्यक विवाद में न बदले।
लोकतंत्र की मजबूती का स्पष्ट संकेत
पूरे घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की भागीदारी में निहित है। जब नागरिक बड़ी संख्या में मतदान करते हैं, तो न केवल शासन व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक नींव भी और अधिक सुदृढ़ होती है।