तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने राज्य की सियासत में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का फैसला कर लिया है। पार्टी ने कुल 234 विधानसभा सीटों में से लगभग 120 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तिरुचिरापल्ली (त्रिची) में पार्टी की कोर कमेटी के साथ एक हाई-प्रोफाइल बैठक की, जिसमें सूक्ष्म चुनावी रणनीति पर व्यापक चर्चा की गई। भाजपा का लक्ष्य है कि इन सीटों पर जीत दर्ज कर खुद को एक सशक्त राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित किया जाए।
AIADMK के साथ ‘प्राकृतिक गठबंधन’ की पुनर्स्थापना
अमित शाह ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि भाजपा और AIADMK का गठबंधन एक ‘नेचुरल एलायंस’ है। उन्होंने माना कि 2024 में अलग-अलग चुनाव लड़ने से नुकसान हुआ, लेकिन अब उद्देश्य है DMK सरकार के कथित भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ संयुक्त रूप से मोर्चा खोलना। साथ ही भाजपा की कोशिश है कि OPS और टीटीवी दिनाकरन जैसे धड़ों को भी साथ लाया जाए, जिससे दक्षिण तमिलनाडु के ‘थेवर’ समुदाय में गठबंधन की पकड़ और मजबूत हो सके।
मजबूत क्षेत्रों पर विशेष रणनीति
भाजपा का ध्यान विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर है जहां पिछले लोकसभा चुनावों में उसका वोट प्रतिशत बढ़ा है। कोयंबटूर और कन्याकुमारी में पार्टी अपने सबसे मजबूत चेहरे उतारने की तैयारी कर रही है। वहीं चेन्नई की चुनिंदा शहरी सीटों और मदुरै के राजनीतिक रूप से प्रभावशाली इलाकों में भी मजबूत ग्राउंड कैंपेन पर जोर दिया जा रहा है। रामेश्वरम और दक्षिणी जिलों में बूथ स्तर तक संगठन विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि पार्टी का जनाधार स्थायी रूप से मजबूत हो।
नए नेतृत्व के साथ सुसंगठित अभियान
नए प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन के नेतृत्व में भाजपा ने अभियान को नई गति दी है। चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल, सह-प्रभारी अर्जुन राम मेघवाल और के. अन्नामलाई की मौजूदगी में अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि वे घर-घर जाकर केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुँचाएं और राज्य सरकार की नीतिगत कमजोरियों को तथ्यात्मक रूप से सामने रखें। भाजपा इस चुनाव को केवल सत्ता की लड़ाई नहीं बल्कि वैकल्पिक शासन मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मान रही है।
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