तंबाकू का सेवन कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है। अस्पतालों पर बोझ बढ़ता है, परिवार आर्थिक और भावनात्मक तनाव झेलते हैं, और देश की उत्पादकता भी प्रभावित होती है। चिंताजनक बात यह है कि अब किशोर और युवा भी ई-सिगरेट और स्मोकलेस तंबाकू जैसे उत्पादों की ओर तेजी से झुक रहे हैं। यह सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं—बल्कि सामाजिक और आर्थिक चिंता का बड़ा विषय बन चुका है।
टैक्स नीति: खपत कम करने का प्रभावी आर्थिक हथियार
सरकार का मानना है कि तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने से इनकी पहुंच कम होगी और लोग इसका इस्तेमाल घटाएँगे। कई देशों ने उच्च टैक्स और कड़े नियम लागू कर खपत में कमी देखी है। भारत में भी टैक्स स्ट्रक्चर को धीरे-धीरे सख्त किया गया है और इसके सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं—खासतौर पर शहरी युवाओं के बीच। हालांकि, सस्ती और अवैध तस्करी वाले उत्पादों पर नज़र रखना भी उतना ही जरूरी है, ताकि नीति का वास्तविक प्रभाव बना रहे।
उद्योग, किसान और रोजगार—एक वास्तविक चुनौती
तंबाकू उद्योग से लाखों किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी जुड़े हुए हैं। नीति-निर्माताओं के सामने चुनौती यह रहती है कि स्वास्थ्य संरक्षण के साथ-साथ आजीविका भी सुरक्षित रहे। यदि अचानक कठोर प्रतिबंध लागू कर दिए जाएँ, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और छोटे व्यापार प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए रोजगार विकल्प, फसल-परिवर्तन कार्यक्रम और वित्तीय सहायता जैसे कदम अनिवार्य माने जा रहे हैं।
जागरूकता: सबसे कारगर सामाजिक समाधान
सिर्फ टैक्स और कानून से तंबाकू सेवन पूरी तरह खत्म नहीं होता—इसके लिए समाज को भी जागरूक होना पड़ता है। स्कूलों, कॉलेजों और मीडिया के माध्यम से तंबाकू-विरोधी अभियान युवाओं के मन में जागरूकता पैदा करते हैं। जब परिवार और समुदाय मिलकर नशामुक्ति का संदेश देते हैं, तो माहौल बदलता है। असली बदलाव वही है जहाँ लोग खुद तंबाकू छोड़ने का फैसला करें।
स्वास्थ्य बनाम राजस्व—सरकार के सामने नैतिक दुविधा
सरकार को तंबाकू उत्पादों से भारी टैक्स राजस्व मिलता है—लेकिन यही राजस्व स्वास्थ्य क्षेत्र में होने वाले खर्च से कहीं कम साबित होता है। एक तरफ आय का स्रोत, दूसरी तरफ जनता का स्वास्थ्य—नीति-निर्माण इसी दोराहे पर खड़ा दिखता है। इसलिए संतुलन बनाना ही सबसे बड़ी कसौटी है।
संतुलित नीति: समाधान का रास्ता
तंबाकू नियंत्रण का मूल उद्देश्य नागरिकों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखना है। लेकिन इसके साथ वैकल्पिक रोजगार, किसानों के लिए नई फसल योजनाएँ, और उद्योगों के पुनर्गठन जैसे कदम भी जरूरी हैं—ताकि आर्थिक झटका न लगे। यदि टैक्स, जागरूकता, कानून और पुनर्वास कार्यक्रम साथ-साथ चलें—तो ही एक स्वस्थ और व्यावहारिक तंबाकू-नीति लागू हो सकती है।
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