कोलकाता: बंगाली फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री (टॉलीवुड) से इस वक्त की सबसे बड़ी और युगांतरकारी खबर सामने आ रही है। टॉलीगंज सिनेमा जगत पर दशकों से अपना एकछत्र प्रभाव रखने वाले संगठन 'फेडरेशन ऑफ सिने टेक्निशियंस एंड वर्कर्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया' (Federation) का दौर अब वर्चुअली समाप्त हो गया है। टॉलीगंज की नवनिर्वाचित विधायक पापिया अधिकारी ने टेक्नीशियन स्टूडियो परिसर में आयोजित एक जनसभा के मंच से ऐतिहासिक घोषणा करते हुए पुराने ढांचे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अब बंगाली मनोरंजन जगत एक नए संगठन—ईस्टर्न इंडिया मोशन पिक्चर्स एंड कल्चरल कन्फेडरेशन (EIMPCC) के हाथ थामकर आगे बढ़ेगा।
परसों से शुरू होगी नई व्यवस्था, निर्माताओं को मिलेगी पूरी आजादी
विधायक पापिया अधिकारी ने साफ किया कि आगामी परसों से ही नए संगठन (EIMPCC) के तहत विभिन्न गिल्डों को एक साथ लाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बंगाली फिल्म उद्योग को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और काम के अनुकूल बनाना है।
पापिया अधिकारी ने मंच से किए ये कड़े फैसले:कर्मचारियों की संख्या का अधिकार: किसी शूटिंग यूनिट में कितने कर्मचारियों की जरूरत है, इसका फैसला केवल और केवल फिल्म के प्रोड्यूसर (निर्माता) और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के हाथ में होगा। इसमें फेडरेशन या किसी बाहरी संगठन की दादागिरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
26 गिल्डों का पुराना ढांचा भंग: अब तक फेडरेशन के तहत काम करने वाले 26 गिल्डों का पुराना स्वरूप अब खत्म हो जाएगा। इसकी जगह डायरेक्टर, सिनेमैटोग्राफर, प्रोडक्शन मैनेजर और कॉस्ट्यूम विभाग जैसे मुख्य स्तंभों को केंद्र में रखकर नया वर्क-कल्चर बनाया जाएगा।
निर्देशक ही होंगे 'कैप्टन ऑफ द शिप'
खोया सम्मान वापस मिलेगा: पापिया अधिकारी ने निर्देशकों (Directors) की गिरती स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि कभी निर्देशकों को अभिभावक जैसा सम्मान मिलता था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी निर्णय लेने की आजादी को छीन लिया गया। अब ऐसा नहीं चलेगा। फिल्म के असली कप्तान डायरेक्टर ही हैं, इसलिए पूरी जिम्मेदारी और फैसले लेने की आजादी उन्हीं के हाथों में सौंपी जाएगी।
भ्रष्टाचार और वसूली पर कड़ा प्रहार, दी चेतावनी
विधायक ने अपने संबोधन में प्रोडक्शन कंट्रोलर और मैनेजर्स की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने माना कि इन विभागों में समय के साथ-साथ बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। पैसे लेकर काम देने और अयोग्य लोगों को घुसाने की शिकायतों की जांच की जाएगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि वे अभी किसी को कानूनी पचड़े में नहीं फंसाना चाहतीं, इसलिए जिन लोगों ने भ्रष्टाचार किया है, वे खुद ही सम्मान के साथ अपने पदों से हट जाएं।
'वोट बैंक की राजनीति नहीं, यह सिनेमा के हित की लड़ाई'
राज्य में हुए बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा करते हुए पापिया अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक कदम का किसी राजनीति या वोट बैंक से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा,
"आप किसे वोट देते हैं, यह आपका व्यक्तिगत फैसला है। हमारी यह लड़ाई केवल और केवल सिनेमा उद्योग और कलाकारों के उज्जवल भविष्य के लिए है, किसी राजनीतिक समीकरण के लिए नहीं।"
EIMPCC का मूल मंत्र: 'शर्त नहीं प्रत्याशा, डर नहीं भरोसा'
राज्य में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली नई व्यवस्था और भाजपा के वरिष्ठ नेता समिक भट्टाचार्य की नीतियों के तहत टॉलीवुड को सिंडिकेट राज और अनावश्यक जबरन वसूली से मुक्त कराने की दिशा में इसे अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस बड़ी घोषणा के बाद टॉलीगंज के गलियारों में सन्नाटा पसरा है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह नए सवेरे की शुरुआत है या किसी नए विवाद का जन्म?