भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी' किए जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब यह प्रस्ताव आगे की प्रक्रिया के लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल को भेजा गया है।
कार्यपरिषद ने दी मंजूरी
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को आधार बनाते हुए नाम परिवर्तन की सिफारिश की गई। कार्यपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया है।
राजा भोज की विरासत का दिया गया हवाला
प्रस्ताव में परमार वंश के महान शासक राजा भोज के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक योगदान का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि राजा भोज ने न केवल शिक्षा और साहित्य को बढ़ावा दिया, बल्कि भोजपाल (वर्तमान भोपाल) क्षेत्र की पहचान को भी नई दिशा दी।
प्रस्ताव के अनुसार, भोपाल की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय का नाम 'मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी' रखा जाना अधिक उपयुक्त माना गया है।
कौन थे बरकतउल्ला भोपाली?
मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में गिने जाते हैं। उनका जन्म भोपाल में हुआ था और उन्होंने विदेशों में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन चलाया। वे गदर आंदोलन से भी जुड़े रहे और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1927 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में उनका निधन हुआ था।
शिक्षा और साहित्य के बड़े संरक्षक थे राजा भोज
इतिहासकारों के अनुसार, राजा भोज ने लगभग 80 ग्रंथों की रचना की थी, जिनमें से 27 ग्रंथ आज भी उपलब्ध हैं। उन्होंने धार में प्रसिद्ध भोजशाला की स्थापना की थी, जो उस समय ज्ञान और शिक्षा का प्रमुख केंद्र मानी जाती थी। भोजशाला में स्थापित मां वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा आज इंग्लैंड के एक संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई है।
अकादमिक ढांचे में भी होंगे बदलाव
नाम परिवर्तन के प्रस्ताव के साथ-साथ विश्वविद्यालय के अकादमिक ढांचे में भी कई महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी गई है। इन सुधारों का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के अनुरूप शैक्षणिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर अब अंतिम फैसला राज्य सरकार और राज्यपाल स्तर पर होने वाली प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा। यह प्रस्ताव प्रदेश की राजनीति और शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।