तमिलनाडु की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा नाम अभिनेता से नेता बने थलपति विजय का बन चुका है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम ने चुनावी नतीजों के बाद अब सत्ता के बेहद करीब पहुंचकर पूरे राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। कांग्रेस के समर्थन के बाद अब वामपंथी दलों और वीसीके ने भी विजय के पक्ष में खुलकर उतरने का फैसला किया है। इसके साथ ही राज्य में नई सरकार बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
बहुमत के जादुई आंकड़े को किया पार
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बाद टीवीके गठबंधन को अब भाकपा, माकपा और वीसीके का समर्थन मिल गया है। इससे विजय के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत के आंकड़े को पार करने में सफल हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समर्थन तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है, क्योंकि दशकों से ये दल द्रमुक के सहयोगी माने जाते रहे हैं।
राजभवन में सरकार गठन की तैयारी तेज
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने विजय को बहुमत साबित करने के लिए 10 मई तक का समय दिया था। इससे पहले विजय दो बार राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि उस समय पर्याप्त समर्थन पत्र नहीं होने के कारण सरकार गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। अब जब आवश्यक समर्थन जुट चुका है, तो विजय जल्द ही तीसरी बार राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष की रणनीति ने बदला खेल
सूत्रों के मुताबिक इस पूरे राजनीतिक समीकरण के पीछे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बड़ी भूमिका रही है। बताया जा रहा है कि उन्होंने वामपंथी दलों के नेताओं से लगातार संपर्क बनाए रखा और राज्य में एक साझा धर्मनिरपेक्ष मोर्चा तैयार करने पर जोर दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि खड़गे की इस रणनीति ने द्रमुक के पारंपरिक सहयोगियों को भी नई दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर दिया।
द्रमुक के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका
भाकपा, माकपा और वीसीके का विजय के साथ जाना मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और द्रमुक के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। लंबे समय से ये दल द्रमुक गठबंधन की अहम ताकत रहे हैं। ऐसे में उनका अलग होना राज्य की राजनीति में सत्ता संतुलन बदलने वाला कदम माना जा रहा है। इससे यह भी साफ संकेत मिला है कि तमिलनाडु में अब विजय तेजी से नए राजनीतिक केंद्र के रूप में उभर चुके हैं।
भाजपा की रणनीति ने बढ़ाई विजय की राह
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा तेज है कि भाजपा सदन में मतदान से दूरी बनाकर रखने की रणनीति अपना सकती है। यदि ऐसा होता है, तो विजय सरकार के लिए बहुमत साबित करना और भी आसान हो जाएगा। इससे तमिलनाडु में आने वाले दिनों में नई राजनीतिक धुरी बनने की संभावना और मजबूत हो गई है।