कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद आई भाजपा सरकार अब राज्य में भारी निवेश और औद्योगिकीकरण पर सबसे ज्यादा जोर दे रही है। इसी सिलसिले में एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमीक भट्टाचार्य ने संकेत दिए हैं कि टाटा समूह एक बार फिर सिंगूर में वापसी कर सकता है। शमीक के इस बयान के बाद बंगाल के सियासी और औद्योगिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
'सिंगूर में ही वापस आए टाटा'
शुक्रवार को समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) को दिए एक इंटरव्यू में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने साफ किया कि राज्य सरकार टाटा समूह को हुगली (सिंगूर) में वापस लाने की इच्छुक है। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि टाटा की वापसी हो और वह भी सिंगूर में ही। हम पूरे देश और दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल अब निवेश के अनुकूल है और नए उद्योगों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।"
शमीक का मानना है कि यदि टाटा सिंगूर लौटता है, तो दो दशक पहले नैनो प्रोजेक्ट के राज्य से बाहर जाने के कारण निवेशकों के बीच जो नकारात्मक संदेश गया था, उसे हमेशा के लिए मिटाया जा सकेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि टाटा के जाने से बंगाल के औद्योगिक माहौल को स्थायी नुकसान पहुंचा था, जिसकी भरपाई अब जरूरी है।
सोशल मीडिया पर भी दी गारंटी: "टाटा फिर लौटेगा..."
शमीक भट्टाचार्य ने सिर्फ इंटरव्यू में ही नहीं, बल्कि अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर भी इस मुद्दे को लेकर एक भावुक और मजबूत पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा:"पश्चिम बंगाल में टाटा की वापसी होकर रहेगी... 3 अक्टूबर 2008 को टाटा को सिंगूर छोड़ने पर मजबूर किया गया था। दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा एक गहरे अफसोस के साथ बंगाल से गए थे। बंगाल के लोग आज भी उस जख्म को नहीं भूले हैं, क्योंकि जब कोई उद्योग जाता है, तो सिर्फ एक कंपनी नहीं जाती, बल्कि हजारों नौकरियां चली जाती हैं और युवाओं का भविष्य अंधकार में डूब जाता है।"
उन्होंने आगे लिखा कि भाजपा का दृढ़ विश्वास है कि बंगाल के विकास का एकमात्र रास्ता सिर्फ और सिर्फ औद्योगिकीकरण है। इसलिए भाजपा ने टाटा को बंगाल में वापस लाने की जिम्मेदारी उठाई है।
क्या है सिंगूर विवाद का इतिहास?
गौरतलब है कि वामपंथियों के शासनकाल के दौरान टाटा समूह अपनी महत्वाकांक्षी 'नैनो कार' परियोजना के लिए सिंगूर आया था। लेकिन तत्कालीन विपक्ष की नेता और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया था। भारी विवाद और विरोध के कारण आखिरकार टाटा को बंगाल छोड़कर गुजरात का रुख करना पड़ा था।
बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तृणमूल सरकार के दौरान वह जमीन किसानों को लौटा तो दी गई, लेकिन खबरों के मुताबिक वह जमीन आज भी खेती के योग्य नहीं बन पाई है। अब उसी जमीन पर फिर से टाटा को वापस लाने की अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा का दावा है कि इस बार टाटा चाहे ऑटोमोबाइल सेक्टर में आए या किसी अन्य सेक्टर में, उनका स्वागत किया जाएगा ताकि बंगाल में रोजगार और विकास की नई लहर आ सके।