कोलकाता/हावड़ा डेस्क: पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में इस समय एक नया नाम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है—'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI)। राजनीतिक हलकों में यह जोर-शोर से कयास लगाए जा रहे हैं कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई बागी सांसद बहुत जल्द इस राजनीतिक दल का दामन थाम सकते हैं। इन अटकलों के सामने आते ही हावड़ा जिले के संकराइल ब्लॉक के हाटगाछा इलाके में स्थित NCPI के राज्य कार्यालय के बाहर अचानक हलचल और आम लोगों की उत्सुकता बेहद बढ़ गई है।
TMC के 20 सांसदों के टूटने का दावा
स्थानीय और राजनीतिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार शाम के बाद से ही NCPI का नाम अचानक राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया। राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 असंतुष्ट और बागी सांसद इस नई पार्टी में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। यदि इन दावों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
कौन संभाल रहा है बंगाल में NCPI की कमान?
मूल रूप से त्रिपुरा में अपनी पहचान बनाने वाली इस राजनीतिक पार्टी का पश्चिम बंगाल में संगठनात्मक जिम्मा संकराइल के हाटगाछा की रहने वाली श्यूली कुंडू (Shiuli Kundu) के हाथों में है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पेशे से वकील श्यूली कुंडू लंबे समय से समाज सेवा से जुड़ी हैं और एक एनजीओ चलाती हैं, जिसमें उनके पति उत्तिय कुंडू भी मदद करते हैं।
इलाके के लोगों का कहना है कि उन्होंने साल 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान झोड़हाट ग्राम पंचायत की एक सीट पर NCPI का उम्मीदवार उतारे जाने के बाद पहली बार इस पार्टी का नाम सुना था। हालांकि, इसके बाद लोकसभा चुनाव और साल 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान इस पार्टी को जमीन पर बहुत ज्यादा सक्रिय या प्रचार करते हुए नहीं देखा गया था।
दफ्तर के बाहर उमड़ी भीड़, पुलिस और केंद्रीय बल तैनात
जैसे ही रविवार शाम को बागी सांसदों के जुड़ने की खबर फैली, हाटगाछा स्थित NCPI कार्यालय के बाहर स्थानीय लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा होने लगी। हालांकि, उस समय दफ्तर पूरी तरह बंद था और काफी आवाज देने के बाद भी अंदर कोई मौजूद नहीं मिला। इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल श्यूली कुंडू से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मामले की संवेदनशीलता और भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाए हैं। सुरक्षा के लिहाज से NCPI कार्यालय के बाहर भारी संख्या में राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों (Central Forces) को तैनात कर दिया गया है।अब पूरे राज्य की नजरें आने वाले कुछ दिनों पर टिकी हैं। क्या वाकई टीएमसी के बागी सांसद अपनी पुरानी पार्टी छोड़ NCPI का झंडा थामेंगे? इस बड़े सियासी सस्पेंस से पर्दा उठना अभी बाकी है।