नई दिल्ली- भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन का नया रिकॉर्ड बनाया है। देश का कुल रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। केंद्र सरकार ने इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान और स्वदेशी रक्षा निर्माण की बड़ी सफलता बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को देश की बढ़ती सैन्य क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रमाण बताया है।
रक्षा उत्पादन में 15.6 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 1.54 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है। रक्षा क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे निवेश, स्वदेशी निर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी के चलते उत्पादन में यह बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार का दावा है कि बीते कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में हुए सुधारों का सीधा असर अब आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।
पीएम मोदी बोले- यह भारत की नई ताकत की झलक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने जल, थल और नभ तीनों क्षेत्रों में अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और आधुनिक तकनीक पर आधारित नीतियों ने देश को रक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
12 साल में चार गुना बढ़ा रक्षा उत्पादन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा उत्पादन केवल 43,746 करोड़ रुपये था। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी करीब 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ गया है। वहीं वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 84,643 करोड़ रुपये था, जिसके मुकाबले अब तक 110 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
राजनाथ सिंह ने बताया मजबूत रक्षा उद्योग का प्रमाण
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भारत के मजबूत होते रक्षा औद्योगिक आधार का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार किए गए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है। उन्होंने सरकारी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र और तेजी से आगे बढ़ेगा।
सरकारी कंपनियों का बड़ा योगदान, निजी क्षेत्र भी मजबूत
रक्षा उत्पादन के कुल आंकड़े में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही है, जबकि निजी क्षेत्र ने 24 प्रतिशत योगदान दिया है। निजी कंपनियों ने करीब 42 हजार करोड़ रुपये का उत्पादन किया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योगों की बढ़ती भागीदारी से प्रतिस्पर्धा और नवाचार दोनों को बढ़ावा मिला है।
रक्षा निर्यात में भी बना नया रिकॉर्ड
रक्षा उत्पादन में बढ़ोतरी का असर निर्यात के आंकड़ों में भी दिखाई दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 38,424 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात किया है। यह भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ती स्वीकार्यता और विश्वसनीयता को दर्शाता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार स्वदेशी हथियार, रक्षा उपकरण और तकनीकी प्रणालियों की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रही है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिली मजबूती
सरकार का कहना है कि रक्षा उत्पादन और निर्यात में आई यह बढ़ोतरी आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता है। स्वदेशी तकनीक, घरेलू निर्माण और रक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने भारत को आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में मदद की है।