घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार को हालिया तेजी पर विराम लगाते हुए गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। वैश्विक आईटी सेवा कंपनी एक्सेंचर (Accenture) द्वारा अपने ग्रोथ गाइडेंस में कटौती किए जाने के बाद आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ नजर आया।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ 76,852.86 अंक पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 150 अंकों से ज्यादा टूटकर 23,991.20 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुख सतर्क दिखाई दिया और अधिकांश सेक्टर दबाव में रहे।
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों में आई तेज बिकवाली रही। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 6 प्रतिशत तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम इंडेक्स में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार, एक्सेंचर द्वारा भविष्य की वृद्धि दर को लेकर सतर्क रुख अपनाने से भारतीय आईटी कंपनियों के कारोबार और नए ऑर्डर मिलने की संभावनाओं को लेकर निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख आईटी शेयरों पर देखने को मिला।
कई सेक्टरों में रही कमजोरी
आईटी के अलावा अन्य प्रमुख सेक्टरों में भी दबाव बना रहा। रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, मेटल, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टरों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में आई तेजी के बाद निवेशक मुनाफावसूली भी कर रहे हैं, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
फार्मा और हेल्थकेयर बने सहारा
जहां अधिकांश सेक्टर गिरावट का सामना कर रहे थे, वहीं कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी फार्मा इंडेक्स 0.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। इसके अलावा हेल्थकेयर इंडेक्स 0.40 प्रतिशत और मिडस्मॉल हेल्थकेयर इंडेक्स 0.38 प्रतिशत ऊपर रहे। निवेशकों ने अनिश्चित बाजार माहौल में अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों का रुख किया।
बैंकिंग शेयरों में दिखी मजबूती
बाजार में गिरावट के बीच बैंकिंग सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की शॉर्ट कवरिंग के कारण बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग शेयरों में अभी भी मजबूती की संभावना बनी हुई है, हालांकि बीच-बीच में मुनाफावसूली के कारण उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
एक्सेंचर की गाइडेंस कटौती का असर
वैश्विक आईटी कंपनी एक्सेंचर ने अपने विकास अनुमान (Growth Guidance) में कटौती की है। इसके बाद निवेशकों को चिंता है कि वैश्विक स्तर पर आईटी सेवाओं की मांग कमजोर हो सकती है, जिसका असर भारतीय आईटी कंपनियों के राजस्व और मुनाफे पर पड़ सकता है। हालांकि बाजार जानकारों का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में हालिया गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन देखने को मिल सकता है, जिससे निचले स्तरों पर खरीदारी भी लौट सकती है।
तेल बाजार से राहत के संकेत
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार से कुछ राहत भरी खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा और वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर 78.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं WTI क्रूड करीब 1 प्रतिशत गिरकर 75.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है क्योंकि इससे महंगाई और आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है।
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत
एशियाई बाजारों में शुक्रवार को मिश्रित रुख देखने को मिला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग सपाट रहे। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे। नैस्डैक में करीब 2 प्रतिशत और एसएंडपी 500 में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर आईटी सेक्टर की कमजोरी का असर अधिक दिखाई दिया।
निवेशकों की नजर आगे क्या?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक आईटी मांग, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल है, लेकिन मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक और बैंकिंग सेक्टर की मजबूती आगे बाजार को सहारा दे सकती है। वहीं आईटी शेयरों में जारी दबाव निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।