भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में मनचाहे स्थान पर पदस्थापना का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुक्रवार, 19 जून से शुरू होगी। विभाग ने आवेदन की तिथि में एक दिन का बदलाव करते हुए अब ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 19 जून से शुरू करने का फैसला लिया है। शिक्षक 23 जून तक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे, जबकि 28 से 30 जून के बीच स्थानांतरण आदेश जारी किए जाएंगे।
पहले यह प्रक्रिया 18 जून से शुरू होनी थी, लेकिन रिक्त पदों की सूची समय पर पोर्टल पर अपलोड नहीं होने के कारण आवेदन तिथि बढ़ा दी गई। हालांकि नई स्थानांतरण नीति में शामिल कुछ शर्तों को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों में नाराजगी और असंतोष देखने को मिल रहा है।
ई-अटेंडेंस की शर्त बनी परेशानी का कारण
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि नई व्यवस्था के चलते प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत शिक्षक स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। उनके अनुसार विभाग ने स्थानांतरण के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित होंगे।
शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण कई बार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में तकनीकी बाधाओं की वजह से उन्हें स्थानांतरण प्रक्रिया से वंचित होना पड़ सकता है।
जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षक भी नहीं होंगे पात्र
नई स्थानांतरण नीति के तहत जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को भी स्वैच्छिक स्थानांतरण के दायरे से बाहर रखा गया है। प्रदेश में लगभग 80 हजार शिक्षक वर्तमान में जनगणना कार्य से जुड़े हुए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाएंगे।
इतना ही नहीं, जिन शिक्षकों के प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण आदेश पहले जारी हो चुके हैं, उनके आदेश भी ड्यूटी अवधि के दौरान स्वतः निरस्त माने जाएंगे।
नियमों में राहत की मांग तेज
शिक्षक संगठनों ने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी और न्यूनतम सेवा अवधि जैसी शर्तों में व्यावहारिक राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि पारिवारिक, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत कारणों से लंबे समय से स्थानांतरण का इंतजार कर रहे हजारों शिक्षकों को नई नीति से राहत मिलने के बजाय निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षक संगठनों का मानना है कि यदि नियमों में संशोधन नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में शिक्षक स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया का लाभ नहीं उठा पाएंगे, जिससे असंतोष और बढ़ सकता है।