नई दिल्ली- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शुक्रवार को 56 वर्ष के हो गए। उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। वहीं कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी को लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और जनसरोकारों की राजनीति का मजबूत चेहरा बताते हुए उन्हें देश के लिए “उम्मीद की किरण” करार दिया। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से भेजे गए शुभकामना संदेश ने भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा बटोरी।
पीएम मोदी ने दी जन्मदिन की बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश जारी करते हुए लिखा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। उन्होंने राहुल गांधी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब केंद्र और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से दी गई शुभकामनाओं को राजनीतिक शिष्टाचार का उदाहरण माना जा रहा है।
राजनीतिक परिवार में हुआ जन्म
राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को हुआ था। वे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्र हैं। उनका शुरुआती जीवन दिल्ली में बीता। उन्होंने सेंट कोलंबस स्कूल और बाद में दून स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को कुछ समय तक घर पर ही पढ़ाई करनी पड़ी थी।
देश-विदेश में की उच्च शिक्षा
राहुल गांधी ने उच्च शिक्षा की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से की। बाद में वे अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय पहुंचे। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से उन्होंने फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट स्टडीज़ में एम.फिल. की डिग्री हासिल की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि को कांग्रेस अक्सर उनकी वैचारिक और नीतिगत समझ से जोड़कर प्रस्तुत करती रही है।
कॉर्पोरेट करियर के बाद राजनीति में एंट्री
राजनीति में आने से पहले राहुल गांधी ने लंदन की मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी मॉनिटर ग्रुप में काम किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने मुंबई में एक टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग कंपनी की स्थापना की। वर्ष 2004 में उन्होंने अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद वे लगातार कांग्रेस संगठन और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
कांग्रेस नेतृत्व से लेकर नेता प्रतिपक्ष तक का सफर
राहुल गांधी 2007 में कांग्रेस महासचिव बने और युवाओं को संगठन से जोड़ने के लिए इंडियन यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में कई संगठनात्मक बदलाव किए। वर्ष 2013 में उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया और 2017 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला। 2019 लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन पार्टी के प्रमुख चेहरों में बने रहे। 9 जून 2024 को उन्हें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया गया, जो उनके राजनीतिक जीवन का पहला संवैधानिक पद बना।
भारत जोड़ो यात्रा से मिली नई पहचान
पिछले कुछ वर्षों में राहुल गांधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के जरिए देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इन यात्राओं ने राहुल गांधी को राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित किया।
कांग्रेस नेताओं ने बताया ‘उम्मीद की किरण’
राहुल गांधी के जन्मदिन पर कांग्रेस नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनकी राजनीतिक भूमिका की सराहना की। केरल की उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने कहा कि राहुल गांधी ने कठिन परिस्थितियों, राजनीतिक हमलों और चुनौतियों के बावजूद लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी नफरत की राजनीति के मुकाबले प्रेम, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश देते रहे हैं। उनके अनुसार, मौजूदा दौर में राहुल गांधी देश के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं।