भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। सकारात्मक घरेलू संकेतों और चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी के दम पर बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,409.98 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 82.30 अंक यानी 0.34 प्रतिशत चढ़कर 24,168.00 के स्तर पर पहुंच गया।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी
- लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी अच्छी मजबूती देखने को मिली।
- निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 255.90 अंक (0.41%) बढ़कर 62,379.25 पर बंद हुआ।
- निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 82.40 अंक (0.44%) की तेजी के साथ 18,705.60 पर बंद हुआ।
इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा व्यापक बाजार में बना हुआ है।
हेल्थकेयर और रियल्टी सेक्टर ने दिखाई मजबूती
गुरुवार के कारोबार में हेल्थकेयर और रियल्टी सेक्टर बाजार के प्रमुख गेनर रहे।
तेजी वाले प्रमुख सेक्टर:
- निफ्टी हेल्थकेयर
- निफ्टी रियल्टी
- निफ्टी पीएसई
- निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज
- निफ्टी पीएसयू बैंक
- निफ्टी फार्मा
- निफ्टी मीडिया
- निफ्टी एनर्जी
- निफ्टी प्राइवेट बैंक
- निफ्टी सर्विसेज
- वहीं आईटी, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में दबाव देखने को मिला।
इन शेयरों ने बढ़ाई बाजार की रफ्तार
सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में इंडिगो, ट्रेंट, बीईएल, एनटीपीसी, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक और एशियन पेंट्स शामिल रहे। इसके अलावा अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा, महिंद्रा एंड महिंद्रा और आईटीसी के शेयरों में भी मजबूती दर्ज की गई।
आईटी शेयरों में रही कमजोरी
बाजार में तेजी के बावजूद आईटी सेक्टर के कई बड़े शेयर दबाव में रहे।
गिरावट वाले प्रमुख शेयर:
- इन्फोसिस
- टेक महिंद्रा
- टीसीएस
- एचसीएल टेक
- मारुति सुजुकी
- एलएंडटी
- कोटक महिंद्रा बैंक
- टाइटन
- भारती एयरटेल
वैश्विक संकेतों पर निवेशकों की नजर
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर शुरुआती सकारात्मक माहौल बना था, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। ऊर्जा कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक वर्ष के अंतिम महीनों में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत
बाजार के लिए राहत की बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। साथ ही भारतीय बॉन्ड यील्ड में नरमी भी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में महंगाई से जुड़ी चिंताएं कम हो सकती हैं। हालांकि निवेशक अभी भी वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित शांति समझौतों को लेकर अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।