दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में एक दर्दनाक विमान हादसा हो गया। नाज्का शहर के बाहरी इलाके में पर्यटकों को लेकर उड़ान भर रहा एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 13 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद विमान में आग लग गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय प्रशासन और राहत दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन विमान में मौजूद किसी भी व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका।
उड़ान के कुछ देर बाद हुआ हादसा
यह विमान पास के इका (Ica) शहर से नाज्का लाइन्स का हवाई दृश्य दिखाने के लिए रवाना हुआ था। उड़ान सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन नाज्का लाइन्स के पास पहुंचने के कुछ समय बाद विमान अचानक नियंत्रण खो बैठा और एक खेत में जा गिरा। दुर्घटना के बाद विमान में भीषण आग लग गई, जिससे वह पूरी तरह जलकर खाक हो गया।विमान में दो पायलट और 11 पर्यटक सवार थे। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने प्रशासन को सूचना दी। बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया, लेकिन सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की मौत हो चुकी थी।
नाज्का लाइन्स का हवाई नजारा देखने निकले थे पर्यटक
बताया जा रहा है कि विमान में सवार सभी पर्यटक विश्व प्रसिद्ध नाज्का लाइन्स को देखने के लिए विशेष दर्शनीय (Scenic) उड़ान पर निकले थे। इन रहस्यमयी आकृतियों को जमीन से पूरी तरह देख पाना संभव नहीं है। इन्हें सही रूप में देखने के लिए पर्यटक आमतौर पर छोटे विमानों या विशेष व्यूइंग टावर का सहारा लेते हैं।
14 वर्षों से सीनिक फ्लाइट संचालित कर रही थी कंपनी
दुर्घटनाग्रस्त विमान का संचालन पेरू की एविएशन कंपनी एरोडियाना (Aerodiana) कर रही थी। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार वह पिछले 14 वर्षों से सेसना ग्रैंड कारवां (Cessna Grand Caravan) विमान के जरिए पर्यटकों को नाज्का लाइन्स का हवाई भ्रमण कराती आ रही है। हादसे के बाद कंपनी ने तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जबकि संबंधित एजेंसियों ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
क्या हैं नाज्का लाइन्स?
नाज्का लाइन्स दुनिया के सबसे रहस्यमयी पुरातात्विक स्थलों में गिनी जाती हैं। ये पेरू की राजधानी लीमा से लगभग 400 किलोमीटर दक्षिण में स्थित नाज्का और पाल्पा रेगिस्तान में फैली विशाल भू-आकृतियां हैं। माना जाता है कि इन्हें नाज्का सभ्यता के लोगों ने लगभग 200 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच बनाया था।
इन आकृतियों को रेगिस्तान की ऊपरी गहरे रंग की मिट्टी और पत्थरों को हटाकर नीचे की हल्की सतह को उजागर करके तैयार किया गया था। इनमें पक्षियों, जानवरों, पेड़ों, ज्यामितीय आकृतियों और कई किलोमीटर लंबी सीधी रेखाओं सहित सैकड़ों डिजाइन शामिल हैं। कई आकृतियों की लंबाई 100 से 300 मीटर या उससे भी अधिक है।
आज भी बना हुआ है रहस्य
वैज्ञानिक और पुरातत्वविद इस बात पर पूरी तरह सहमत नहीं हो पाए हैं कि नाज्का लाइन्स किस उद्देश्य से बनाई गई थीं। कुछ विशेषज्ञ इन्हें धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़ते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इनका संबंध जल स्रोतों की पहचान, खगोलीय अध्ययन या सांस्कृतिक गतिविधियों से हो सकता है। बेहद शुष्क जलवायु और कम वर्षा होने के कारण ये आकृतियां करीब दो हजार वर्षों से सुरक्षित बनी हुई हैं और आज यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में शामिल हैं।
पहले भी हो चुके हैं विमान हादसे
नाज्का लाइन्स के ऊपर पर्यटकों को हवाई भ्रमण कराने वाले विमानों के साथ पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2022 में एक छोटा पर्यटक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले वर्ष 2010 में भी इसी क्षेत्र में हुए विमान हादसे में छह लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बाद एक बार फिर पर्यटक विमानों की सुरक्षा व्यवस्था और उड़ान संचालन पर सवाल उठने लगे हैं।
जांच में जुटीं एजेंसियां
पेरू की विमानन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने हादसे की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विमान के तकनीकी रिकॉर्ड, मौसम की स्थिति और उड़ान से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।