नई दिल्ली: NEET आंदोलन के बीच सुर्खियों में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब एक नए विवाद में घिर गई है। सूरत के RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग करते हुए चुनाव आयोग (ECI), सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) और महाराष्ट्र सरकार के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। अमित तिवारी का कहना है कि CJP को मिले कथित 1 करोड़ रुपये के फंड, संगठन की कानूनी स्थिति और अभिजीत दीपके के परिवार की आय एवं संपत्ति की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित एजेंसियों से तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की है।
RTI एक्टिविस्ट ने किन बातों पर उठाए सवाल?
अमित तिवारी ने दावा किया कि अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और उनकी मासिक आय लगभग 60 से 65 हजार रुपये बताई जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि परिवार की आय इतनी सीमित थी, तो बच्चों की विदेश, विशेषकर अमेरिका में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया गया। इसी आधार पर उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति और संपत्तियों की जांच कराने की मांग की है।
तीन अलग-अलग संस्थाओं में दर्ज कराई शिकायत
RTI एक्टिविस्ट के मुताबिक इस मामले में तीन अलग-अलग सरकारी संस्थाओं से जांच की मांग की गई है।
चुनाव आयोग (ECI) से CJP की कानूनी स्थिति और राजनीतिक गतिविधियों की जांच की मांग।
CBIC से कथित 1 करोड़ रुपये की फंडिंग पर टैक्स नियमों की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग।
महाराष्ट्र सरकार से आय से अधिक संपत्ति की संभावना की जांच कराने का अनुरोध।
उनका कहना है कि यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
CJP की कानूनी स्थिति पर भी सवाल
अमित तिवारी ने आरोप लगाया कि CJP एक राजनीतिक दल की तरह गतिविधियां संचालित कर रही है और लोगों से आर्थिक सहयोग भी प्राप्त कर रही है। उनका कहना है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक दल के रूप में कार्य करता है और सार्वजनिक रूप से फंड जुटाता है, तो उसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत चुनाव आयोग में पंजीकरण कराना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि CJP का कानूनी दर्जा क्या है और यदि आवश्यक हो तो इस संबंध में उचित कार्रवाई की जाए।
कथित 1 करोड़ रुपये की फंडिंग पर भी उठे सवाल
RTI एक्टिविस्ट ने दावा किया कि राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा CJP को 1 करोड़ रुपये का फंड दिए जाने के मामले की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने CBIC से अनुरोध किया है कि यदि लागू नियमों के तहत किसी प्रकार की कर देनदारी बनती है तो उसकी भी जांच की जाए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
NEET आंदोलन को लेकर भी जताई आपत्ति
अमित तिवारी ने CJP के नेतृत्व में हुए NEET विरोध प्रदर्शन की भी आलोचना की। उनका कहना है कि आंदोलन की शुरुआत छात्रों के हित और NEET पेपर लीक के मुद्दे को लेकर हुई थी, लेकिन बाद में यह अपने मूल उद्देश्य से भटक गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित एजेंसियों के समक्ष शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
अभी जांच होना बाकी
फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है। संबंधित एजेंसियों की ओर से जांच पूरी होने या किसी प्रकार के निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे मामलों में अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट और सक्षम प्राधिकरण के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।