केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आगामी मानसून और मानसून के बाद के मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर देशभर की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और स्वास्थ्य संस्थानों को सतर्कता बढ़ाने तथा समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डेंगू-मलेरिया पर हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय मंत्री ने देश में डेंगू और मलेरिया की वर्तमान स्थिति का आकलन किया। उन्होंने कहा कि इन बीमारियों की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निगरानी तंत्र मजबूत करने, मामलों की शीघ्र पहचान करने और संभावित प्रकोप की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दे चुका है।
अस्पतालों में दवाओं और बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश
नड्डा ने अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को पर्याप्त दवाओं, जांच सुविधाओं, रक्त घटकों, अस्पताल बेड और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को बिना किसी बाधा के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए। इसके साथ ही डेंगू और मलेरिया के उपचार के लिए निर्धारित मानक उपचार दिशानिर्देशों और क्लीनिकल प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने पर भी जोर दिया गया।
मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए स्रोत नियंत्रण सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने, नियमित फॉगिंग और अन्य जनस्वास्थ्य उपायों को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्यों और स्थानीय निकायों से संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार रोकथाम अभियान चलाने की अपील की।
जनजागरूकता अभियान को बताया सबसे बड़ा हथियार
नड्डा ने कहा कि डेंगू और मलेरिया से बचाव में जनजागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियानों को व्यापक स्तर पर संचालित करने पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, स्वच्छता बनाए रखें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
समाज की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, पंचायती राज संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि सामुदायिक सहयोग के बिना मच्छरजनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
जिला स्तर पर बनेगी विशेष रणनीति
बैठक में रोग निगरानी प्रणाली, स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों, दवाओं और जांच किटों की उपलब्धता, वेक्टर नियंत्रण उपायों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की गई। नड्डा ने जिला स्तर पर माइक्रो प्लान और विशेष रणनीतियां तैयार करने के निर्देश दिए, खासकर उन इलाकों में जहां डेंगू और मलेरिया का खतरा अधिक रहता है।
मलेरिया नियंत्रण में भारत की बड़ी उपलब्धि
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत ने मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2015 से 2025 के बीच मलेरिया के मामलों और इससे होने वाली मौतों में लगभग 80 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा 2022 से 2025 के बीच देश के 160 जिलों में मलेरिया का एक भी स्वदेशी मामला दर्ज नहीं हुआ, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों और सरकारी प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।