नई दिल्ली- मुंबई के डोंबिवली स्थित शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा फिर चर्चा में है। इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय शोध रिपोर्टों ने भी चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में हर 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मी अपने करियर के दौरान शारीरिक हिंसा का शिकार होते हैं, जबकि गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न को जोड़ने पर यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक पहुंच जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में बढ़ते हमलों को रोकने के लिए सख्त कानून और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरत है।
IMA ने जारी किया डॉक्टरों पर हमलों का डिजिटल रिकॉर्ड
मुंबई की घटना के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने देशभर में डॉक्टरों पर हुए हमलों का एक डिजिटल ग्रिड जारी किया है। इसमें हाल के वर्षों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए 100 हमलों का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया है। संगठन ने केंद्र सरकार से डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी केंद्रीय कानून बनाने की मांग दोहराई है।
WHO रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया के करीब 40 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मी अपने कार्यकाल के दौरान शारीरिक हिंसा का सामना करते हैं। यदि मौखिक दुर्व्यवहार, धमकी और अभद्र भाषा को भी शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
भारत समेत कई देशों में डॉक्टरों पर बढ़े हमले
स्पेन के मेडिकल जर्नल 'Atención Primaria' में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार डॉक्टरों पर हिंसा के मामले जर्मनी में 91%, चीन में 90%, पेरू में 84.5%, तुर्किए में 84% और भारत में 77.3% तक दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हिंसा अब वैश्विक समस्या बन चुकी है।
क्या हैं हमलों की सबसे बड़ी वजहें?
विशेषज्ञों के अनुसार अस्पतालों में अत्यधिक भीड़, डॉक्टरों और स्टाफ की कमी, इलाज में देरी, मरीजों के परिजनों का बढ़ता तनाव और डॉक्टरों से तुरंत परिणाम की उम्मीद हिंसा की प्रमुख वजहें हैं। कई मामलों में डॉक्टर और मरीज के परिजनों के बीच संवाद की कमी भी विवाद को गंभीर रूप दे देती है।
कानून होने के बावजूद नहीं थम रहे हमले
भारत के 19 राज्यों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून लागू हैं, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टरों पर हमले लगातार सामने आ रहे हैं। महाराष्ट्र में 2010 से 2021 के बीच डॉक्टरों पर हमले के 738 मामले दर्ज हुए, लेकिन इनमें केवल 4 मामलों में सजा हो सकी। विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
दूसरे देशों ने ऐसे घटाए हमले
स्पेन ने स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले को 'राज्य के खिलाफ अपराध' घोषित किया, जिसके बाद ऐसे मामलों में करीब 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं सिंगापुर में डॉक्टरों या स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने पर 5,000 सिंगापुर डॉलर तक का जुर्माना, एक साल तक की जेल या दोनों का प्रावधान है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी इसी तरह के सख्त केंद्रीय कानून की आवश्यकता है।