अयोध्या- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे "नैतिक पतन की पराकाष्ठा" बताया है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भगवान के चढ़ावे में भी चोरी करता है, तो उसके खिलाफ बेहद कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने सरकार से कानून में बदलाव कर ऐसे मामलों में मौत की सजा का प्रावधान करने पर विचार करने की बात कही। हालांकि यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान न्यायालय की मौखिक टिप्पणी (Oral Observation) के रूप में आई है।
कोर्ट ने भ्रष्टाचार पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि देश में भ्रष्टाचार को लोग सामान्य मानने लगे हैं और जब तक कोई पकड़ा नहीं जाता, तब तक उसे गलत भी नहीं समझा जाता। उन्होंने कहा कि ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स में भारत की स्थिति भी चिंता का विषय है। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े चढ़ावे में चोरी समाज के नैतिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
बुलडोजर कार्रवाई मामले की सुनवाई के दौरान आई टिप्पणी
यह टिप्पणी हमीरपुर निवासी फैमुद्दीन और अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आई। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदार पर दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस और प्रशासन उनकी संपत्तियों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कोर्ट से संपत्ति की सुरक्षा की मांग की। इस मामले में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की राय अलग-अलग होने के कारण प्रकरण को तीसरे न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने नई SIT गठित करने के दिए निर्देश
इससे पहले 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जांच किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और जांच अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचनी चाहिए।
चढ़ावा चोरी मामले में 8 आरोपी जेल में
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। आरोप है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी और आभूषणों की चोरी की गई। इस मामले में दर्ज एफआईआर के बाद एसआईटी जांच में ट्रस्ट की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे। जांच रिपोर्ट में चढ़ावा गिनती प्रक्रिया में कथित लापरवाही का जिक्र किया गया, जिसके बाद ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
मामले ने देशभर में खींचा ध्यान
राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद देशभर में इस पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच के निर्देशों के बाद अब सभी की नजर नई एसआईटी की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।