प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस की महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह उनकी सातवीं आधिकारिक फ्रांस यात्रा है, जो अपने आप में दोनों देशों के संबंधों की गहराई को दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में किसी देश के साथ इतनी नियमित और उच्चस्तरीय बातचीत तभी संभव होती है जब दोनों पक्षों के बीच विश्वास, रणनीतिक समझ और दीर्घकालिक साझेदारी का मजबूत आधार मौजूद हो। पिछले एक दशक में भारत और फ्रांस के संबंध केवल औपचारिक कूटनीतिक संपर्कों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने वैश्विक चुनौतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अनेक मुद्दों पर मिलकर काम किया है।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ होगी अहम वार्ता
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता में रक्षा सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष अनुसंधान, स्वच्छ ऊर्जा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक निवेश जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत संवाद स्थापित रहा है, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है।
नवाचार और प्रौद्योगिकी सहयोग पर रहेगा विशेष फोकस
प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के नीस शहर में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। इस आयोजन में भारत और फ्रांस के अनेक नवाचार आधारित उद्यम, निवेशक और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां भाग लेंगी। वर्तमान वैश्विक अर्थव्यवस्था में तकनीकी नवाचार विकास का प्रमुख आधार बन चुका है और दोनों देश इस क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भारत और फ्रांस की साझेदारी भविष्य में महत्वपूर्ण परिणाम दे सकती है।
जी-7 मंच पर भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस में आयोजित जी-7 सम्मेलन की गतिविधियों में भी भाग लेंगे। भारत भले ही जी-7 का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन विश्व अर्थव्यवस्था, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक संतुलन में उसकी बढ़ती भूमिका को देखते हुए उसे लगातार महत्व दिया जा रहा है। इस बार फ्रांस द्वारा भारत को विभिन्न चर्चाओं और गतिविधियों में व्यापक भागीदारी प्रदान करना भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता का संकेत माना जा रहा है। यह भी दर्शाता है कि फ्रांस वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है।
कठिन समय में भी फ्रांस ने निभाई मित्रता
भारत और फ्रांस के संबंधों की सबसे बड़ी विशेषता उनका परस्पर विश्वास है। जब वर्ष 1998 में भारत ने परमाणु परीक्षण किए थे और कई पश्चिमी देशों ने प्रतिबंधात्मक रुख अपनाया था, तब फ्रांस ने अपेक्षाकृत संतुलित दृष्टिकोण अपनाया। इस घटना ने दोनों देशों के बीच विश्वास को और मजबूत किया। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ऐसे अवसर बहुत कम आते हैं जब कोई देश दबाव की परिस्थितियों में भी अपने साझेदार के साथ संवाद बनाए रखे। यही कारण है कि भारत फ्रांस को केवल रणनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि भरोसेमंद मित्र के रूप में भी देखता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का मजबूत समर्थक
फ्रांस लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का समर्थन करता रहा है। वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और उभरती शक्तियों को अधिक प्रतिनिधित्व देने के प्रश्न पर दोनों देशों की सोच काफी हद तक समान रही है। आतंकवाद, क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर भी फ्रांस ने कई बार भारत की चिंताओं को समझते हुए समर्थन दिया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक निकटता को और मजबूत बनाता है।
रक्षा और सुरक्षा साझेदारी बनी संबंधों की धुरी
भारत और फ्रांस के संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा सहयोग माना जाता है। पिछले कई वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में व्यापक सहयोग विकसित हुआ है। सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और उन्नत रक्षा प्रणालियों के क्षेत्र में दोनों देश लगातार साथ काम कर रहे हैं। हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने को लेकर भी दोनों देशों के हित काफी हद तक समान हैं। यही कारण है कि सुरक्षा सहयोग आज भारत-फ्रांस संबंधों की प्रमुख आधारशिला बन चुका है।
बदलती दुनिया में और मजबूत हो रही साझेदारी
वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है और नई आर्थिक तथा सामरिक चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण बन गई है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों को जन्म दे सकती है और आने वाले वर्षों में इस रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहराई प्रदान कर सकती है। यही वजह है कि फ्रांस आज भारत की विदेश नीति में सबसे भरोसेमंद और महत्वपूर्ण साझेदार देशों में शामिल माना जाता है।