मार्च की शुरुआत एक विशेष खगोलीय घटना के साथ हो रही है। आज 3 मार्च को वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा, जिसका इंतज़ार खगोल प्रेमियों को लंबे समय से था। यह ग्रहण लगभग 45 मिनट तक दिखाई देगा। शाम 6 बजे से 6:45 बजे के बीच पूरा असर स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। साफ आसमान होने पर लोग खुले में अपनी आंखों से ही यह दृश्य देख सकेंगे।
ब्लड मून क्यों दिखाई देता है?
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है। इसी घटना को चंद्र ग्रहण कहते हैं। इस दौरान चंद्रमा का रंग हल्का लाल या तांबे जैसा दिखने लगता है। यही वजह है कि इसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। वातावरण में मौजूद धूल और प्रकाश का बिखराव इस लालिमा को और गहरा कर देता है, जिससे दृश्य बेहद मनमोहक बन जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में सूतक का महत्व
भारतीय परंपरा में ग्रहण से पहले सूतक काल माना जाता है। सूतक लगने के बाद मंदिरों के द्वार बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ तथा भोजन बनाने से बचा जाता है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक सामान्य प्राकृतिक घटना है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं का पालन आज भी देश के कई हिस्सों में होता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और पूजा को शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर विशेष आरती और शुद्धिकरण कार्यक्रम भी किए जाते हैं।
ग्रहण के दौरान किन बातों का ध्यान रखें
चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखा जा सकता है। यह सूर्य ग्रहण की तरह खतरनाक नहीं होता, इसलिए किसी विशेष सुरक्षा उपकरण की आवश्यकता नहीं पड़ती। फिर भी, चंद्रमा को देखने के लिए दूरबीन या टेलिस्कोप का उपयोग करने से दृश्य और अधिक स्पष्ट हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह घटना सुरक्षित है, क्योंकि चंद्र ग्रहण केवल प्रकाश और छाया का खेल है, जिससे शरीर पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता।
वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों में उत्सुकता
देश भर के खगोल विज्ञान संस्थानों और वेधशालाओं ने आज विशेष अवलोकन कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च का यह ग्रहण तुलनात्मक रूप से छोटा जरूर है, लेकिन ‘ब्लड मून’ का दृश्य इसे खास बनाता है। इसके कारण आज सोशल मीडिया पर भी ‘Blood Moon India Time’ ट्रेंड करने की संभावना है।
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