सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है, लेकिन ज्येष्ठ माह में आने वाली अमावस्या को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ होगी और 17 मई की रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर ज्येष्ठ अमावस्या का पर्व 16 मई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। शनिवार के दिन पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या का विशेष महत्व भी प्राप्त हो रहा है।
शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का अद्भुत संयोग
इस बार की ज्येष्ठ अमावस्या कई शुभ योगों का संगम लेकर आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शनिदेव का प्राकट्य हुआ था, इसलिए शनि जयंती भी इसी तिथि पर मनाई जाएगी। वहीं विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए वट सावित्री व्रत भी रखेंगी। एक ही दिन इन तीन प्रमुख पर्वों का संयोग इसे और अधिक दुर्लभ और पुण्यकारी बना रहा है।
पितरों की शांति और पुण्य प्राप्ति का श्रेष्ठ दिन
ज्येष्ठ अमावस्या को पितरों के निमित्त किए गए कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन गंगा, नर्मदा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष कम होता है। इसके साथ ही तर्पण और पिंडदान करने से परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है तथा जीवन की बाधाएं दूर होने लगती हैं।
शनिदेव की कृपा पाने का विशेष अवसर
शनिश्चरी अमावस्या होने के कारण इस दिन शनिदेव की पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष चल रहा हो, उन्हें इस दिन विशेष पूजा, दान और मंत्र जाप करना चाहिए। पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाने और जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द, तेल तथा वस्त्र दान करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आ रही परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
दान-पुण्य से मजबूत होता है भाग्य
धार्मिक ग्रंथों में अमावस्या पर दान को अत्यंत प्रभावशाली बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन किया गया अन्नदान, जलदान और वस्त्रदान कई जन्मों के पापों का नाश करता है। विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने से कुंडली के कई दोष शांत होते हैं और भाग्य मजबूत बनता है। इस दिन धार्मिक कार्यों और सत्कर्मों में समय बिताना अत्यंत शुभ माना गया है।
आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर मानी जाती है यह तिथि
ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार अमावस्या का दिन आत्मचिंतन, साधना और ईश्वर आराधना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। ज्येष्ठ अमावस्या पर ध्यान, मंत्र जाप और पूजा-पाठ करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यही कारण है कि इस दिन लाखों श्रद्धालु मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।