भारत की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने हाल ही में एक गंभीर एडवाइजरी जारी कर देशभर के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं, संस्थानों और कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट ‘डिफेंडिंग अगेंस्ट फ्रंटियर AI ड्रिवन साइबर रिस्क्स’ में कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित साइबर हमले अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, खतरनाक और जटिल हो चुके हैं। 26 अप्रैल 2026 को जारी इस चेतावनी में AI को उभरते हुए बड़े डिजिटल खतरों में शामिल किया गया है।
अब मशीनें खुद ढूंढ रही हैं सिस्टम की कमजोरियां
CERT-In के अनुसार आधुनिक AI सिस्टम अब इतने उन्नत हो चुके हैं कि वे विशाल स्तर पर कोड और डिजिटल नेटवर्क का विश्लेषण कर सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का पता लगा सकते हैं। पहले यह कार्य साइबर विशेषज्ञों और अनुभवी हैकर्स द्वारा किया जाता था, लेकिन अब AI इस पूरी प्रक्रिया को स्वतः संचालित कर रहा है। इससे साइबर हमलों की गति कई गुना बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI किसी नेटवर्क में मौजूद कमजोर बिंदुओं की पहचान कर उन पर हमला करने की रणनीति तैयार कर सकता है। यह प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि कई बार सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर को हमले का पता चलने से पहले ही नुकसान हो चुका होता है।
आवाज और चेहरे की नकली पहचान बन रही नया हथियार
एडवाइजरी में डीपफेक तकनीक को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। AI अब ऐसी आवाज और वीडियो तैयार कर सकता है जो पूरी तरह वास्तविक लगते हैं। साइबर अपराधी इस तकनीक का उपयोग कर लोगों को धोखा देने के नए तरीके अपना रहे हैं। कई मामलों में ठग बैंक अधिकारी, कंपनी प्रतिनिधि या परिचित व्यक्ति की नकली आवाज में कॉल कर संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, AI आधारित वीडियो तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा और हावभाव तक हूबहू तैयार किए जा सकते हैं। इससे वीडियो कॉल और डिजिटल पहचान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियां और गंभीर हो गई हैं।
फिशिंग हमले अब पहले से ज्यादा खतरनाक
CERT-In ने कहा है कि AI की मदद से तैयार किए गए ईमेल और संदेश इतने वास्तविक लगते हैं कि आम लोगों के लिए उन्हें पहचानना बेहद मुश्किल हो गया है। साइबर अपराधी अब बैंक, सरकारी विभाग या बड़ी कंपनियों के नाम से नकली संदेश भेजकर लोगों को लिंक पर क्लिक करने या निजी जानकारी साझा करने के लिए फंसाते हैं।
AI अब व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधियों का विश्लेषण कर उसके अनुसार व्यक्तिगत संदेश भी तैयार कर सकता है। यही कारण है कि आधुनिक फिशिंग हमले पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और खतरनाक माने जा रहे हैं।
छोटे हमले से बड़े नेटवर्क तक फैल सकता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार AI आधारित साइबर हमले केवल एक डिवाइस तक सीमित नहीं रहते। एक बार सिस्टम में प्रवेश मिलने के बाद AI धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क में फैल सकता है। यह कमजोर पासवर्ड, पुराने सॉफ्टवेयर और असुरक्षित नेटवर्क का फायदा उठाकर कई सिस्टमों को प्रभावित कर सकता है। इसका असर केवल व्यक्तिगत डेटा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बैंकिंग सेवाओं, सरकारी नेटवर्क और बड़ी कंपनियों की डिजिटल संरचनाओं तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि एजेंसी ने संगठनों को अपनी साइबर सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करने की सलाह दी है।
डिजिटल दुनिया में अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि AI के इस दौर में लोगों को डिजिटल सतर्कता को अपनी आदत बनाना होगा। किसी भी अनजान कॉल, वीडियो संदेश या ईमेल पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। बैंकिंग जानकारी, ओटीपी और पासवर्ड किसी के साथ साझा करने से बचना बेहद जरूरी है। इसके अलावा मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी सुरक्षा उपायों को अपनाना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गया है।
तकनीकी क्रांति के साथ बढ़ रही नई चुनौती
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जहां एक ओर दुनिया को नई तकनीकी सुविधाएं दे रहा है, वहीं दूसरी ओर यह साइबर अपराधों के लिए भी नए रास्ते खोल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में AI आधारित साइबर हमले और अधिक उन्नत हो सकते हैं। ऐसे में सरकार, कंपनियों और आम नागरिकों को मिलकर डिजिटल सुरक्षा के प्रति अधिक जागरूक और तैयार रहना होगा।