सनातन परंपरा में दस महाविद्याओं की साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है, जिनमें मां बगलामुखी का स्थान विशिष्ट है। इन्हें शत्रुनाश और स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वर्ष 2026 में उनकी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जा रही है, जो साधना और उपासना के लिए अत्यंत शुभ अवसर लेकर आई है।
अष्टमी तिथि और उदयातिथि का संयोग
धार्मिक गणनाओं के अनुसार, अष्टमी तिथि का प्रारंभ 23 अप्रैल की रात्रि 08:49 बजे से हो रहा है और इसका समापन 24 अप्रैल की शाम 07:21 बजे तक रहेगा। उदयातिथि के नियम के अनुसार 24 अप्रैल को ही जयंती मनाई जाएगी। यह संयोग साधकों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि इस दिन की गई उपासना शीघ्र सिद्धि प्रदान करती है।
शुभ मुहूर्त में पूजन का महत्व
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04:19 से 05:03 तक रहेगा, जो साधना आरंभ करने के लिए अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। वहीं अभिजीत मुहूर्त 11:53 से 12:46 तक रहेगा, जिसे पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इन शुभ समयों में की गई आराधना भक्तों को विशेष फल प्रदान करती है और देवी की कृपा प्राप्त होती है।
पूजा विधि में पीले रंग का विशेष महत्व
मां पीताम्बरा को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन की पूजा में पीले रंग का विशेष स्थान होता है। स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा आरंभ करनी चाहिए। पूजा में पीले फूल, पीले फल और पीले आसन का उपयोग करने से साधना का प्रभाव बढ़ता है। यह रंग सकारात्मक ऊर्जा, स्थिरता और विजय का प्रतीक माना जाता है।
व्रत, दान और साधना की परंपरा
बगलामुखी जयंती के दिन कई भक्त व्रत रखते हैं और पूरे दिन नियमपूर्वक साधना करते हैं। रात्रि में फलाहार ग्रहण कर अगले दिन विधिपूर्वक पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन दान का भी विशेष महत्व होता है, जो साधक को पुण्य फल प्रदान करता है और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है।
मंत्र जाप और स्तंभन शक्ति की प्राप्ति
इस दिन हल्दी की माला से देवी के बीज मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। कम से कम 108 बार मंत्र जाप करने से मां बगलामुखी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को शत्रुओं पर विजय, वाकसिद्धि और संकटों से मुक्ति प्रदान करती हैं। यह साधना केवल बाहरी शत्रुओं के लिए ही नहीं, बल्कि आंतरिक नकारात्मक भावनाओं को शांत करने के लिए भी प्रभावी मानी जाती है।
भक्तों के लिए अलग-अलग स्वरूप में कृपा
मां पीताम्बरा अपने भक्तों को उनके भाव के अनुसार फल प्रदान करती हैं। तांत्रिक साधकों के लिए वे स्तंभन की देवी हैं, वहीं गृहस्थ जीवन जीने वालों के लिए वे ममतामयी शक्ति के रूप में सभी कष्टों को दूर करने वाली हैं। इस दिन की गई आराधना जीवन में संतुलन, सफलता और शांति का मार्ग प्रशस्त करती है।