अयोध्या: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की कथा के दौरान अपने संबोधन में भगवान श्रीराम को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आदर्शों के केंद्र में भगवान श्रीराम हैं और जिसका भी “भारत का DNA” है, उसके आदर्श भी श्रीराम ही हैं। सीएम ने कहा कि भारत की धरती केवल आस्था की नहीं, बल्कि संस्कारों और आदर्शों की भूमि है, जहां श्रीराम के जीवन से हर समस्या का समाधान खोजा जा सकता है।
‘भारत के DNA में बसे हैं श्रीराम’
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति या पूर्वाग्रह से अलग होकर देखें तो हर भारतीय के संस्कारों में श्रीराम समाहित हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन 500 वर्षों तक चला और अंततः 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह निर्णय दिया कि जहां रामलला विराजमान हैं, वही उनकी जन्मभूमि है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के पीछे ऐतिहासिक प्रमाण और गहरे सांस्कृतिक तथ्य मौजूद थे।
‘यह केवल मंदिर नहीं, व्यापक सांस्कृतिक दृष्टि है’
मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन लोकमंगल और आदर्श शासन का प्रतीक है, जो समाज को सही दिशा देने का कार्य करता है। सीएम ने कहा कि रामायण और महाभारत के उदाहरण हमें बताते हैं कि सत्य और कुसंगति का प्रभाव समाज पर गहरा पड़ता है।
कुसंगति और विनाश का उदाहरण दिया
सीएम योगी ने महाभारत के शकुनि-दुर्योधन और रामायण के रावण, मारीच, खर-दूषण जैसे पात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत संगति हमेशा विनाश की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसी नकारात्मक शक्तियों से सावधान रहना चाहिए जो उसे विभाजित करने का प्रयास करती हैं।
समाज में एकता और संस्कारों की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बांटने की कोशिशें हमेशा होती रही हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति का मूल संदेश एकता और सद्भाव है। उन्होंने कहा कि राम और शिव के आदर्शों को अपनाकर ही समाज सही दिशा में आगे बढ़ सकता है। सीएम ने कहा कि जो लोग भारतीय संस्कारों और संस्कृति का सम्मान नहीं करते, उनके लिए यह भूमि केवल एक भौगोलिक स्थान हो सकती है, लेकिन भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्र है।
रामभक्ति की गहरी परंपरा का उल्लेख
सीएम योगी ने कहा कि भारत के गांवों में आज भी रामभक्ति की गहरी परंपरा देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा जैसी रचनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय समाज में राम के आदर्श कितनी गहराई तक बसे हुए हैं।