ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए डबल डेकर एलिवेटेड रोड बनाने की योजना प्रस्तावित है। करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क शाहबेरी, क्रॉसिंग रिपब्लिक होते हुए एनएच-9 तक कनेक्टिविटी बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। लगभग 2.5 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का उद्देश्य व्यस्त सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करना और लोगों के सफर को आसान बनाना है। हालांकि, परियोजना अभी शुरुआती चरण में है और निर्माण से पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जानी है।
1200 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी डबल डेकर एलिवेटेड रोड
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित सड़क के निर्माण पर करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस खर्च को नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) मिलकर उठाएंगे। परियोजना का अनुमानित बजट तैयार किया जा चुका है। अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को पत्र भेजा है। डीपीआर तैयार होने के बाद निर्माण की तकनीकी रूपरेखा और अन्य जरूरी पहलुओं पर स्पष्टता आएगी।
मूर्ति गोलचक्कर से एनएच-9 तक होगा सड़क का विस्तार
प्रस्तावित योजना के अनुसार, एलिवेटेड रोड की शुरुआत मूर्ति गोलचक्कर से होगी। इसके बाद शाहबेरी नाले तक सड़क को डबल डेकर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। आगे शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक होते हुए एनएच-9 तक सिंगल डेकर एलिवेटेड रोड बनाने की योजना है। यह सड़क करीब 2.5 किलोमीटर लंबी और तीन लेन वाली प्रस्तावित है। इसके निर्माण से आसपास के रिहायशी इलाकों से मुख्य मार्ग तक पहुंचना आसान हो सकता है। इसके अलावा, शाहबेरी नाले के किनारे से तिगरी के पास 60 मीटर चौड़ी सड़क को जोड़ने के लिए एक अतिरिक्त मार्ग बनाने का भी प्रस्ताव है। इससे क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
दो स्तरों पर चलेगा ट्रैफिक, मुख्य सड़क पर कम होगा दबाव
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत सड़क के दो स्तर होंगे। डबल डेकर व्यवस्था के तहत निचले हिस्से में मौजूदा सड़क का इस्तेमाल ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बीच आने-जाने वाले वाहन कर सकेंगे। वहीं, ऊपर बनने वाली एलिवेटेड रोड से यातायात को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्रस्ताव के मुताबिक, ऊपरी सड़क की चौड़ाई करीब 9 से 10 मीटर होगी। इससे मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर सुबह और शाम ऑफिस आने-जाने के समय ट्रैफिक का बोझ कम होने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक राहत सड़क की अंतिम डिजाइन, कनेक्टिविटी और यातायात प्रबंधन पर निर्भर करेगी।
बढ़ती आबादी के बीच क्यों जरूरी है यह परियोजना?
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में पिछले कुछ वर्षों में आवासीय सोसायटियों और रिहायशी इलाकों का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही निजी वाहनों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है। व्यस्त सड़कों पर जाम के कारण लोगों को ऑफिस पहुंचने, बच्चों को स्कूल छोड़ने और दूसरे जरूरी कामों के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ता है। शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक जैसे इलाकों में बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित एलिवेटेड रोड ग्रेटर नोएडा, नोएडा और गाजियाबाद के बीच आवागमन को सुगम बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, परियोजना के पूरा होने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
डीपीआर तैयार होने के बाद आगे बढ़ेगी निर्माण प्रक्रिया
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के मुताबिक, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए एनएचएआई को पत्र भेजा गया है। डीपीआर में सड़क के डिजाइन, निर्माण की तकनीकी जरूरतों और परियोजना से जुड़े अन्य पहलुओं का आकलन किया जाएगा। रिपोर्ट तैयार होने के बाद आगे की प्रक्रिया को लेकर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, परियोजना प्रस्तावित है और निर्माण शुरू होने की तारीख स्पष्ट नहीं है। ऐसे में लोगों को अभी निर्माण कार्य शुरू होने और सड़क चालू होने की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा। यदि योजना तय रूप में आगे बढ़ती है, तो इससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।
क्या बदलेगा लोगों का सफर?
करीब 1200 करोड़ रुपये की यह प्रस्तावित परियोजना ग्रेटर नोएडा वेस्ट के यातायात को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम हो सकती है। मूर्ति गोलचक्कर से शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक होते हुए एनएच-9 तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से यात्रियों को राहत मिलने की संभावना है। दो स्तरों पर यातायात की व्यवस्था मुख्य सड़क पर दबाव कम करने में मदद कर सकती है। लेकिन अभी परियोजना डीपीआर तैयार करने के चरण में है। निर्माण की समयसीमा और सड़क के चालू होने की तारीख सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लोगों को जाम से कब तक राहत मिल पाएगी।