अयोध्या - उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर निर्माण के बाद से श्रद्धालुओं की भारी संख्या में आमद के साथ दान का सिलसिला भी लगातार जारी है। जानकारी के अनुसार, राम मंदिर को अब तक 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक का दान प्राप्त हो चुका है।
नकद से लेकर सोना-चांदी तक का दान
मंदिर में श्रद्धालु विभिन्न माध्यमों से दान कर रहे हैं। कुछ लोग सीधे ट्रस्ट के बैंक खातों में राशि जमा करते हैं, जबकि कई श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर ट्रस्ट कार्यालय में दान देते हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर में लगाए गए दान पात्रों में भी बड़ी मात्रा में नकद राशि जमा होती है। इनमें 10, 20, 50, 100 और 500 रुपये के नोटों के साथ सिक्के भी शामिल होते हैं।
मंदिर संचालन और निर्माण में हो रहा उपयोग
मंदिर को प्राप्त दान का उपयोग निर्माण कार्य, रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था, पुजारियों और कर्मचारियों के वेतन तथा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और अन्य सुविधाओं पर किया जाता है। ट्रस्ट का कहना है कि दान राशि का उपयोग मंदिर के दीर्घकालिक विकास और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जा रहा है।
सोना-चांदी की जिम्मेदारी SPMCIL के पास
मंदिर में बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं भी दान स्वरूप प्राप्त हो रही हैं। इन आभूषणों और बहुमूल्य धातुओं की जांच, मूल्यांकन और सुरक्षित प्रबंधन की जिम्मेदारी सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड को सौंपी गई है। संस्था इन धातुओं का मूल्यांकन कर उन्हें सुरक्षित रखने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का कार्य करती है।
श्रद्धा का बना राष्ट्रीय प्रतीक
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और आस्था का प्रतीक बन चुका है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और रिकॉर्ड दान राशि इस बात का संकेत है कि मंदिर के प्रति लोगों का जुड़ाव और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।