उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में विजयादशमी के मौके पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और दशहरा मेले के दौरान हुए अलग-अलग हादसों ने उत्सव के माहौल को मातम में बदल दिया। प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुई इन घटनाओं में कुल 19 लोगों की जान चली गई। कहीं नदी और तालाब में डूबने से लोगों की मौत हुई, तो कहीं सड़क दुर्घटनाओं और बिजली के करंट ने लोगों की जिंदगी छीन ली। हादसों में सबसे दर्दनाक घटना गोरखपुर में सामने आई, जहां हाईटेंशन बिजली की लाइन की चपेट में आने से तीन युवकों की मौत हो गई। वहीं, प्रयागराज, गोंडा, बाराबंकी और फतेहपुर समेत कई जिलों में विसर्जन के दौरान डूबने की घटनाएं सामने आईं। इन हादसों के कारण त्योहार की खुशियां कई परिवारों के लिए गहरे दुख में बदल गईं।
गोरखपुर में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आए तीन युवक
गोरखपुर के जंगल अयोध्या प्रसाद इलाके में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली हाईटेंशन बिजली की लाइन की चपेट में आ गई। बताया गया कि बिजली के तार के संपर्क में आने के बाद प्रतिमा में करंट उतर आया, जिससे तीन युवकों की जान चली गई। मृतकों की पहचान 17 वर्षीय लकी, 18 वर्षीय विक्की और 21 वर्षीय चंदन के रूप में हुई है। इनमें लकी और विक्की सगे भाई थे, जबकि चंदन उनका मौसेरा भाई था। एक ही परिवार से जुड़े तीन युवकों की मौत से इलाके में शोक का माहौल बन गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताते हुए सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी की गई। विसर्जन यात्रा में ड्यूटी पर तैनात दो सिपाहियों और बिजली निगम के एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित किया गया, जबकि दो लाइनमैनों को बर्खास्त कर दिया गया।
गोंडा और सोनभद्र में सड़क दुर्घटनाओं में पांच की मौत
विजयादशमी के दौरान उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों ने भी कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। गोंडा जिले के वजीरगंज में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से लौट रहे लोगों की ट्रैक्टर-ट्रॉली एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी गंभीर थी कि कई लोग घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों में शामिल संजय कोरी और आशीष गौतम ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि आठ अन्य लोगों का उपचार जारी रहा। दूसरी घटना सोनभद्र जिले में रेणुकूट-बीजपुर मार्ग पर हुई। यहां दशहरा मेले में जा रहे लोगों से भरा एक टेंपो कार से टकरा गया। दुर्घटना में 12 वर्षीय अंकुश, 23 वर्षीय अंजलि और 30 वर्षीय सुनील की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस हादसे में 16 अन्य लोग घायल हुए। दोनों घटनाओं में कुल पांच लोगों की जान चली गई, जिससे त्योहार के दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
विसर्जन के दौरान नदी और तालाब में डूबने से 11 मौतें
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान नदी और तालाब में डूबने की घटनाएं भी सामने आईं। इन हादसों में कुल 11 लोगों की मौत होने की जानकारी है। कई लोग विसर्जन के लिए जलाशयों में उतरे थे, लेकिन गहराई और पानी में डूबने के कारण उनकी जान नहीं बच सकी। प्रयागराज, गोंडा, बाराबंकी और फतेहपुर में ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं। अलग-अलग स्थानों पर हुई इन मौतों ने त्योहार के दौरान नदी और तालाबों में सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को सामने ला दिया। हादसों के शिकार लोगों में युवा और किशोर भी शामिल थे। इन घटनाओं से मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। प्रशासन और स्थानीय लोगों के सामने ऐसी घटनाओं को रोकने तथा विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती भी सामने आई।
प्रयागराज में टोंस नदी में डूबने से चाचा-भतीजे की मौत
प्रयागराज जिले के कौंधियारा क्षेत्र में टोंस नदी में डूबने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान दीवान का पूरा निवासी 22 वर्षीय अमित और उनके 20 वर्षीय भतीजे राहुल के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, दोनों नदी में डूब गए और इस हादसे में उनकी जान चली गई। चाचा और भतीजे की एक साथ मौत से परिवार में शोक का माहौल बन गया। विजयादशमी के अवसर पर हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों को भी दुखी कर दिया। नदी में डूबने की यह घटना उन हादसों में शामिल है, जिन्होंने इस बार दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। ऐसे हादसे जलाशयों में उतरते समय सावधानी बरतने और सुरक्षा इंतजामों की जरूरत को भी रेखांकित करते हैं।
गोंडा में नदी में डूबने से चार लोगों की जान गई
गोंडा जिले में विसर्जन के दौरान डूबने की अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। तरबगंज क्षेत्र में लक्ष्मणपुर के पास टेढ़ी नदी में डूबने से भैरमपुर निवासी 20 वर्षीय सुमित, 18 वर्षीय अभिषेक तिवारी और 20 वर्षीय रामविलास की जान चली गई। एक ही स्थान पर तीन लोगों की मौत से इलाके में दुख का माहौल बन गया। वहीं, जिले के धानेपुर क्षेत्र में भैसहवा घाट पर कुआनो नदी में डूबने की एक अन्य घटना सामने आई। यहां शिवबक्शपुरवा निवासी तुलाराम शुक्ला की मौत हो गई। इस तरह गोंडा में नदी में डूबने की घटनाओं में चार लोगों की जान चली गई। इन हादसों ने विसर्जन के दौरान नदियों में पानी की गहराई और सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान देने की जरूरत को सामने रखा।
बाराबंकी में तालाब में डूबने से युवक की मौत
बाराबंकी जिले के फतेहपुर क्षेत्र के नंदरासी में तालाब में डूबने से 40 वर्षीय अंबर प्रसाद की मौत हो गई। वह निजामपुर के निवासी थे। जानकारी के अनुसार, अंबर प्रसाद तालाब में उतरे थे, लेकिन पानी में डूब गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें तालाब से बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी सीएचसी ले जाया गया। हालांकि, वहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से उनके परिवार और आसपास के इलाके में शोक छा गया। त्योहार के दौरान तालाब में डूबने की यह घटना भी प्रदेश में सामने आए उन हादसों में शामिल रही, जिनमें लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
फतेहपुर में तालाब और नदी में डूबने से चार मौतें
फतेहपुर जिले में डूबने की दो अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। खागा क्षेत्र के कुशियारीपुर में तालाब में डूबने से 20 वर्षीय आदित्य, 18 वर्षीय राजा और 16 वर्षीय अभिमन्यु की जान चली गई। तीनों की मौत से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं, जिले के जहानाबाद क्षेत्र में तेजानगर के पास रिंद नदी में डूबने की एक और घटना हुई। इसमें कुशियारीपुर निवासी अभिषेक की मौत हो गई। इस तरह फतेहपुर में तालाब और नदी से जुड़ी घटनाओं में चार लोगों की जान चली गई। लगातार सामने आई इन घटनाओं ने दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान जलाशयों के आसपास सुरक्षा और सतर्कता की जरूरत को उजागर किया। त्योहार के बीच हुई इन मौतों ने कई परिवारों को गहरे दुख में छोड़ दिया।
त्योहार की खुशियों के बीच कई परिवारों में मातम
उत्तर प्रदेश में विजयादशमी के अवसर पर हुए इन हादसों में डूबने, सड़क दुर्घटनाओं और बिजली के करंट से कुल 19 लोगों की मौत हुई। सबसे अधिक 11 लोगों की जान पानी में डूबने से गई, जबकि सड़क हादसों में पांच और करंट लगने से तीन लोगों की मौत हुई। गोरखपुर में एक ही परिवार से जुड़े तीन युवकों की मौत और अलग-अलग जिलों में हुई दुर्घटनाओं ने उत्सव के माहौल को गमगीन कर दिया। इन घटनाओं से स्पष्ट हुआ कि बड़े धार्मिक आयोजनों और विसर्जन यात्राओं के दौरान बिजली की लाइनों, यातायात तथा जलाशयों के आसपास सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। त्योहार के दौरान हुई इन मौतों ने प्रभावित परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है।