लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जमीनों की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री प्रक्रिया को आसान, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग को पूरी तरह तकनीक आधारित सिस्टम में बदलने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालयों को आधुनिक सुविधाओं और डिजिटल तकनीक के माध्यम से ऐसा मॉडल बनाया जाए, जिससे आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।
रजिस्ट्री ऑफिस बनेंगे आधुनिक सेवा केंद्र
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि उप-निबंधक कार्यालयों को पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित किया जाए, जहां लोगों को एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं मिलें। उन्होंने कहा कि हेल्प डेस्क, टोकन सिस्टम, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से विकसित की जाएं ताकि नागरिकों को लंबी कतारों और अनावश्यक देरी से राहत मिल सके।
पेपरलेस रजिस्ट्रेशन और AI से होगा बड़ा बदलाव
सीएम योगी ने विभाग में पेपरलेस रजिस्ट्रेशन, दस्तावेजों के पूर्ण डिजिटाइजेशन, जियो-टैगिंग, आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक और आईरिस आधारित सत्यापन को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सिस्टम को भी मजबूत करने पर जोर दिया, जिससे संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी।
मानकीकृत मूल्यांकन से रुकेगी गड़बड़ी
मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता और एकरूपता के लिए मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली लागू की जाए। इससे बाजार आधारित सही मूल्यांकन सुनिश्चित होगा और रजिस्ट्री से जुड़े विवादों एवं कर चोरी पर रोक लगेगी, जिससे आम जनता और सरकार दोनों को लाभ मिलेगा।
निवेश और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश का प्रमुख केंद्र बन रहा है, इसलिए कानूनों और प्रक्रियाओं को और अधिक सरल और व्यावहारिक बनाया जाए। उन्होंने कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, एलएलपी और रेरा से जुड़े प्रावधानों को समयानुकूल बनाने के निर्देश दिए, ताकि राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूती मिले और निवेशकों का भरोसा बढ़े।
राजस्व में रिकॉर्ड वृद्धि
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2016-17 में स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की आय 11,613 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 2025-26 में 32,598 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। इसी तरह पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या भी 28 लाख से बढ़कर 49 लाख से अधिक पहुंच गई है, जिसे सरकार ने बड़ी उपलब्धि माना है।