कैंची धाम का स्थापना दिवस हर वर्ष भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, लेकिन इस बार उत्साह और श्रद्धा का स्तर और भी अधिक दिखाई दे रहा है। 15 जून को आयोजित होने वाले इस पावन अवसर पर आश्रम परिसर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो जाएगा। प्रशासन और आश्रम प्रबंधन को उम्मीद है कि इस बार एक लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं। पहाड़ों की शांत वादियों में गूंजते भक्ति के स्वर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देंगे।
1962 में रखी गई थी आध्यात्मिक केंद्र की नींव
कैंची धाम की स्थापना वर्ष 1962 में परम संत बाबा नीम करौली महाराज ने की थी। अपने जीवनकाल में बाबा ने प्रेम, सेवा, भक्ति और मानवता का संदेश दिया, जिसने लाखों लोगों को प्रभावित किया। समय के साथ यह आश्रम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रहा, बल्कि विश्वभर के साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बन गया। आज भी बाबा के चमत्कारों और कृपा की अनगिनत कथाएं भक्तों के बीच प्रचलित हैं, जो लोगों को यहां आने के लिए प्रेरित करती हैं।
महाआरती और विशेष पूजा का रहेगा आकर्षण
स्थापना दिवस के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। सुबह से हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम चलते रहेंगे। धार्मिक अनुष्ठानों के पूर्ण होने के बाद विशेष महाआरती संपन्न होगी, जिसमें हजारों श्रद्धालु एक साथ शामिल होकर बाबा और हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। आश्रम में प्रतिदिन होने वाली प्रातः और सायंकालीन आरती के साथ स्थापना दिवस की महाआरती विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है और यही कार्यक्रम श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र होता है।
मालपुए के भोग की अनूठी परंपरा
बाबा नीम करौली महाराज को मालपुए का भोग अत्यंत प्रिय माना जाता है। स्थापना दिवस पर विशेष रूप से मालपुए का भोग अर्पित किया जाएगा और उसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा कैंची धाम की पहचान बन चुकी है। हजारों श्रद्धालु न केवल बाबा के दर्शन के लिए बल्कि इस प्रसाद को ग्रहण करने को भी अपने लिए सौभाग्य मानते हैं।
बड़ा मंगल बढ़ाएगा श्रद्धालुओं की संख्या
इस वर्ष स्थापना दिवस के अगले दिन ज्येष्ठ माह का बड़ा मंगल भी पड़ रहा है, जिससे भक्तों का उत्साह और बढ़ गया है। हनुमान भक्तों के लिए बड़ा मंगल विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यही कारण है कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रशासन ने यातायात, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और भीड़ प्रबंधन को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
क्यों खास है कैंची धाम?
कैंची धाम को केवल एक आश्रम नहीं बल्कि आध्यात्मिक जागरण और आंतरिक शांति का केंद्र माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग यहां ध्यान, साधना और मानसिक शांति की तलाश में पहुंचते हैं। अनेक भक्त अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और कठिन परिस्थितियों से मुक्ति का श्रेय बाबा की कृपा को देते हैं। यही कारण है कि समय के साथ कैंची धाम की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है।
भक्ति, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम
स्थापना दिवस का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का उत्सव है। बाबा नीम करौली महाराज के प्रति अटूट श्रद्धा रखने वाले भक्त इस अवसर को अपने जीवन का विशेष क्षण मानते हैं। पहाड़ों की गोद में स्थित यह पावन धाम एक बार फिर भक्ति के रंग में रंगने जा रहा है, जहां हर ओर केवल श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होगा।