उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक मार्ग पर हुई एक रहस्यमय घटना ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नैनीताल निवासी 23 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे अपने दो मित्रों के साथ उत्तरकाशी भ्रमण पर आई थीं। पर्वतीय पर्यटन और साहसिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में घूमने के बाद तीनों ने दयारा बुग्याल ट्रेक का कार्यक्रम बनाया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन ट्रेक के दौरान अचानक छात्रा के लापता हो जाने से प्रशासन और परिजनों की चिंता बढ़ गई है। घटना ने पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पर्यटन यात्रा से शुरू हुआ घटनाक्रम, ट्रेकिंग के दौरान बढ़ा रहस्य
जानकारी के अनुसार छात्रा अपने साथियों के साथ हर्षिल, गंगोत्री और आसपास के अन्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर चुकी थीं। 28 मई को तीनों रैथल गांव में ठहरे थे, जहां स्थानीय प्रतिष्ठानों और मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में वे अंतिम बार एक साथ दिखाई दिए। अगले दिन उन्होंने दयारा बुग्याल की ओर ट्रेकिंग शुरू की और गोई बेस कैंप तक पहुंचे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रात तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन आधी रात के बाद छात्रा रहस्यमय परिस्थितियों में कैंप से गायब हो गईं। यही तथ्य इस पूरे मामले को और अधिक उलझा रहा है।
पांच दिन बाद भी नहीं मिला कोई ठोस सुराग
घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद खोजी दलों को अभी तक कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली है। सामान्यतः पर्वतीय क्षेत्रों में लापता व्यक्तियों के मामलों में कुछ न कुछ संकेत मिल जाते हैं, लेकिन इस मामले में स्थिति अलग दिखाई दे रही है। खोजी दलों को न तो छात्रा का कोई सामान मिला है और न ही ऐसा कोई प्रमाण जो उनके संभावित स्थान का संकेत दे सके। यही कारण है कि जांच एजेंसियां हर संभावना पर विचार कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि खोज अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ जाती।
सेना, आईटीबीपी और आपदा बलों का संयुक्त अभियान
लापता छात्रा की तलाश के लिए अभूतपूर्व स्तर पर खोज अभियान संचालित किया जा रहा है। सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस विभाग, वन विभाग और जिला आपदा प्रबंधन इकाइयों को एक साथ लगाया गया है। लगभग 150 सदस्यीय दल दिन-रात अभियान में जुटा हुआ है। पर्वतीय क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद खोज दल लगातार नए इलाकों की तलाशी ले रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर चलाया जा रहा अभियान राज्य के हालिया वर्षों के सबसे व्यापक खोज अभियानों में शामिल है।
दुर्गम पहाड़ियां और घने जंगल बना रहे चुनौती
दयारा बुग्याल और उसके आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यही भौगोलिक परिस्थितियां खोज अभियान के लिए बड़ी चुनौती भी बन रही हैं। ऊंचे पर्वत, खड़ी ढलानें, घने जंगल और कई किलोमीटर तक फैले निर्जन क्षेत्र खोज कार्य को जटिल बना रहे हैं। कई स्थान ऐसे हैं जहां पैदल पहुंचना भी बेहद कठिन है। खराब मौसम और बदलती पर्वतीय परिस्थितियां भी अभियान की गति को प्रभावित कर रही हैं। इसके बावजूद राहत एवं बचाव दल लगातार संभावित स्थानों की जांच कर रहे हैं।
ड्रोन और स्निफर डॉग्स की ली जा रही मदद
आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए खोज अभियान को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ड्रोन कैमरों की सहायता से दुर्गम क्षेत्रों की हवाई निगरानी की जा रही है, जबकि स्निफर डॉग्स को भी संभावित मार्गों पर लगाया गया है। विशेषज्ञ दल आसपास की गुफाओं, जंगलों और घाटियों की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं। हालांकि अब तक किसी प्रकार का ठोस संकेत नहीं मिला है, फिर भी प्रशासन को उम्मीद है कि तकनीकी संसाधनों और व्यापक तलाशी अभियान से जल्द कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
ट्रेकिंग एजेंसियों की जवाबदेही पर उठे सवाल
इस घटना के बाद साहसिक पर्यटन गतिविधियों के संचालन और ट्रेकिंग एजेंसियों की जिम्मेदारियों को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग के दौरान सुरक्षा मानकों का कठोर पालन आवश्यक है। प्रतिभागियों की निगरानी, रात्रि सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन संपर्क प्रणाली और नियमित उपस्थिति सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। प्रशासन भी इस पूरे मामले में संबंधित एजेंसी की भूमिका और सुरक्षा प्रबंधन की जांच कर रहा है।
परिजनों की उम्मीदें कायम, पूरे प्रदेश की नजरें खोज अभियान पर
पांच दिनों से जारी इस रहस्यमय गुमशुदगी ने छात्रा के परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। परिजन लगातार प्रशासन और बचाव दलों से संपर्क बनाए हुए हैं तथा सकारात्मक परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं। दूसरी ओर पूरे प्रदेश की निगाहें इस खोज अभियान पर टिकी हुई हैं। सभी की प्रार्थना है कि छात्रा सुरक्षित मिले और इस रहस्य से जल्द पर्दा उठ सके। फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खोज अभियान पूरी क्षमता के साथ जारी रहेगा और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।