मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कल्याण सिंह ने राम भक्तों और संतों की भावनाओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री पद का त्याग कर दिया। जब राम जन्मभूमि आंदोलन निर्णायक मोड़ पर था, तब उन्होंने न राजनीतिक समीकरण देखे और न ही सत्ता का मोह पाला। उन्होंने खुले मन से स्वयं जिम्मेदारी लेते हुए प्रभु श्रीराम के सम्मान को सर्वोच्च माना। यह निर्णय भारतीय राजनीति में त्याग और धर्मनिष्ठा के आदर्श रूप में याद किया जाता है।
उत्तर प्रदेश के पहले भाजपा मुख्यमंत्री — बदलाव की दिशा तय
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के पहले भाजपा मुख्यमंत्री थे। जब उन्होंने 1991 में सत्ता संभाली, तब प्रदेश अराजकता, असुरक्षा और शासनिक अव्यवस्था से जूझ रहा था। ऐसे समय में उन्होंने मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखाई और जनता में यह विश्वास जगाया कि सरकार न्याय, अनुशासन और जवाबदेही के साथ कार्य करेगी।
सुशासन और विकास की नई पहचान
कल्याण सिंह के कार्यकाल को सुशासन की दिशा में एक मजबूत पड़ाव माना जाता है। योजनाओं का लाभ गांवों, गरीबों, किसानों और युवाओं तक पहुँचाना उनकी प्राथमिकता रही। कानून व्यवस्था सुधार, विकास कार्यों की गति और प्रशासनिक पारदर्शिता ने उत्तर प्रदेश की छवि को बेहतर बनाने में बड़ा योगदान दिया। लोग महसूस करने लगे कि राज्य एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है।
राष्ट्रवाद बना जीवन का मूल मंत्र
एक साधारण किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से राष्ट्रवाद का संस्कार पाया। यही भाव आगे चलकर उनके जीवन का मंत्र बन गया। विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल — हर भूमिका में उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। निजी जीवन की सादगी और लोकसेवा की भावना ने उन्हें जननायक बना दिया।
इतिहास और स्मृतियों में सदैव जीवित रहेंगे ‘बाबूजी’
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कल्याण सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका समर्पण, त्याग और राष्ट्रभक्ति पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भारतीय जनमानस में उनका नाम उस नेता के रूप में अंकित है जिसने सत्ता को नहीं, सिद्धांतों को चुना। रामभक्ति और राष्ट्रसेवा के इस अद्वितीय संगम ने उन्हें इतिहास में अमर बना दिया।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरक व्यक्तित्व
कल्याण सिंह की राजनीतिक यात्रा केवल पदों की प्राप्ति तक सीमित नहीं रही। उन्होंने दिखाया कि सच्चा नेतृत्व वही है जो धर्म, राष्ट्रधर्म और जनहित के प्रति पूर्ण निष्ठा रखे। उनका जीवन संदेश देता है कि सत्ता साधन है, साध्य नहीं — और राष्ट्रहित हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए।
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