माघ मेले में माला बेचने आई बासमती की सादगी और कजरारी आंखों ने लोगों को इस कदर आकर्षित किया कि वह देखते ही देखते सोशल मीडिया पर रील स्टार बन गईं। श्रद्धालु और पर्यटक अब उनके पास माला खरीदने से ज्यादा वीडियो और रील बनाने पहुंच रहे हैं। बासमती के चेहरे की मासूम मुस्कान और स्वाभाविक अंदाज़ ने उन्हें मेले की भीड़ में अलग पहचान दे दी है—मानो साधारण जिंदगी से निकलकर अचानक वह एक लोकल सेलेब्रिटी बन गई हों।
अफसाना—माला कम, फोटो ज्यादा बिक रही है
दूसरी ओर अफसाना भी इस अप्रत्याशित लोकप्रियता से हैरान हैं। उनका कहना है कि लोग उनसे माला खरीदने के बजाय सेल्फी और वीडियो बनाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अफसाना मुस्कुराते हुए कहती हैं—“अब तो लगता है फोटो ही मेरी माला से ज्यादा बिक रही है।” उनकी इस candid प्रतिक्रिया ने भी सोशल मीडिया पर खूब दिल जीते हैं।
मोनालिसा के बाद जारी है वायरल ट्रेंड
इससे पहले माघ मेले में चर्चा में आई युवती ‘मोनालिसा’ ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी थी, जिन्हें लोग ‘इलाहाबाद की मोनालिसा’ कहने लगे। उस ट्रेंड के बाद अब बासमती और अफसाना ने मेले के डिजिटल पन्नों में नई एंट्री कर ली है। इससे साफ है कि धार्मिक आस्था के इस महाकुंभ में सोशल मीडिया का प्रभाव अब नई दिशा तय कर रहा है।
आस्था और डिजिटल दुनिया का अनोखा संगम
माघ मेला हमेशा से श्रद्धा, स्नान और साधना का प्रतीक रहा है। लेकिन इस बार यहां रील्स, सेल्फी स्टिक्स और कैमरों की चमक भी बराबरी से दिख रही है। भक्तों और पर्यटकों के लिए यादें संजोना अब मोबाइल स्क्रीन से जुड़ गया है—जहां भावनाएं भी वायरल होती हैं और मुस्कानें भी।
मेले की पहचान बदल रही है—आस्था से आगे सोशल कनेक्शन
विशेषज्ञ मानते हैं कि सोशल मीडिया के दौर में लोकल कहानियां पलक झपकते वैश्विक हो जाती हैं। माघ मेले की यह लोकप्रियता बताती है कि आज धार्मिक आयोजन सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद और डिजिटल कनेक्ट का भी बड़ा मंच बन चुके हैं—जहां हर चेहरा अपनी कहानी कहता है।
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