प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते मानव और वन्यजीव संघर्ष को लेकर चकराता से कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं और इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। विधायक ने कहा कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास लगातार सिमट रहा है जंगलों का क्षेत्र घटता जा रहा है। इसके साथ ही दिसंबर माह में बारिश न होने के कारण पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ चुका है, जिसका सीधा असर जंगलों और वहां रहने वाले जानवरों पर पड़ा है। उन्होंने इसे जलवायु परिवर्तन और बदलते पर्यावरण से भी जोड़ा।
हमलों में कई लोगों की जान गई
प्रीतम सिंह ने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में बाघ और भालू जैसे जंगली जानवरों के आवास से बाहर निकलकर आबादी वाले इलाकों में आकर लोगों पर हमला करने की घटनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है और स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार वन्यजीवों की सुरक्षा को ज्यादा महत्व दे रही है, जबकि आम आदमी की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना था कि यह स्थिति समाज के कमजोर वर्गों के लिए बेहद खतरे की है। प्रीतम सिंह ने सरकार से मांग की कि वह इस गंभीर मुद्दे को शीघ्र संज्ञान में लेते हुए ठोस नीति बनाएं, जिससे जंगली जानवरों को आबादी से दूर रखा जा सके और उन्हें जंगलों में वापस भेजने की प्रभावी व्यवस्था की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाए और इसे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के रूप में देखा जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के संघर्षों को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि यह केवल वन्यजीवों का नहीं, बल्कि मानव जीवन की भी रक्षा का सवाल है इसलिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
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