उत्तर प्रदेश में वाहन प्रदूषण जांच (PUC) नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब वाहनों की प्रदूषण जांच के लिए ओटीपी केवल उसी मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा, जो वाहन पंजीकरण के समय दर्ज कराया गया था। यदि वाहन मालिक का मोबाइल नंबर बदल गया है या खो गया है, तो पहले उसे अपडेट कराना अनिवार्य होगा, तभी प्रदूषण जांच की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। परिवहन विभाग के अनुसार बिना प्रदूषण जांच वाहन चलाने पर 10 हजार रुपये तक का चालान किया जा सकता है। प्रदेश में करीब 4.8 करोड़ से अधिक वाहन पंजीकृत हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों को छोड़कर सभी वाहनों के लिए प्रदूषण जांच अनिवार्य है। अभी तक प्रदूषण जांच के दौरान किसी भी मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजकर प्रक्रिया पूरी की जा रही थी, जिससे गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है। परिवहन अधिकारियों का कहना है कि इससे वाहन स्वामियों को समय पर चालान और जांच संबंधी जानकारी भी मिल सकेगी।
कितने समय तक मान्य होती है जांच
बीएस-6 (2020 के बाद) वाहन: 1 वर्ष
बीएस-4 (2014–2020) वाहन: 1 वर्ष
बीएस-3 (2014 से पहले) वाहन: 6 महीने
प्रदूषण जांच शुल्क
दोपहिया पेट्रोल वाहन: ₹70
चार पहिया पेट्रोल/सीएनजी: ₹90
डीजल वाहन: ₹120
लाखों चालान लंबित
विभागीय आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में 27 लाख से अधिक ई-चालान हुए, जिनमें करीब 22 लाख चालान लंबित हैं। इसकी बड़ी वजह वाहन स्वामियों तक सूचना नहीं पहुंचना माना गया। नए नियम से यह समस्या कम होने की उम्मीद है।
मोबाइल नंबर कैसे अपडेट करें
वाहन मालिक Parivahan पोर्टल पर जाकर Online Services → Vehicle Related Services में मोबाइल नंबर अपडेट कर सकते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया में वाहन नंबर, चेसिस नंबर और इंजन नंबर के अंतिम अंक दर्ज करने होंगे। जरूरत पड़ने पर एआरटीओ कार्यालय जाकर भी आवेदन किया जा सकता है।
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