उत्तराखंड में पशुपालकों को पशु आहार उपलब्ध कराने के लिए धामी सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री घस्यारी योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत सहकारिता विभाग के द्वारा प्रदेश के पशुपालकों को उचित दरों में पशु आहार उपलब्ध कराया जाता है जिससे पशुपालकों को काफी राहत मिल रही थी। योजना का उद्देश्य था महिलाओं को अपने पशुओं के लिए चारा पत्ती लाने के लिए जंगलों में कम जाना पड़े जंगल जाने के दौरान अक्सर महिलाओं के साथ दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है और जंगल में जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है।
8 करोड रुपए का बकाया
वर्तमान में पशु आहार की सप्लाई बंद होने से प्रदेश के पशुपालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिसका असर चंपावत जिले सहित पूरे प्रदेश में पढ़ रहा है। चंपावत जिले के डेयरी संचालक व भाजपा प्रवक्ता राजेश बिष्ट ने जानकारी देते हुए बताया जो कंपनी पूरे प्रदेश में पशुपालकों को साइलेज देती है उन्होंने पिछले एक माह से साइलेज की सप्लाई देनी बंद कर दी है। जिसकी वजह से प्रदेश के सभी पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक सरकार ने उनका 8 करोड रुपए का बकाया भुगतान करना है जिस कारण सप्लाई बंद की गई है। डेयरी संचालक राजेश बिष्ट व क्षेत्र के सैकड़ो पशुपालकों ने कहा पशु आहार की सप्लाई बंद होने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पशुपालकों की मुख्यमंत्री से प्रार्थना
वर्तमान में जंगलों में गुलदार व भालू का आतंक होने की वजह से महिलाएं चारा पत्ती लाने के लिए जंगल तक नहीं जा पा रही है। जिस कारण पशुपालन करने में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजेश बिष्ट व सैकड़ो पशुपालकों ने सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जल्द से जल्द पशु आहार की सप्लाई सुचारु करने की मांग की है। बिष्ट ने कहा यह संदेश सरकार के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इसलिए मेरी व क्षेत्र के पशुपालकों की मुख्यमंत्री से प्रार्थना है कि मामले का संज्ञान लेकर त्वरित कार्यवाही कर पशुपालकों को राहत पहुंचाई जाए। कहा पशु आहार न मिलने का असर दुग्ध उत्पादन में भी पड़ रहा है जिससे पशुपालकों की आजीविका पर असर पड़ने की पूरी संभावना है। कहां पशुपालकों के द्वारा ऋण लेकर पशुपालन व्यवसाय किया जा रहा है।
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