पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर वोटर लिस्ट और चुनावी आंकड़ों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। BJP नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि TMC द्वारा लगाए गए दोनों बड़े आरोप चुनावी आंकड़ों के सामने पूरी तरह “फेल” हो जाते हैं।
TMC ने लगाए थे दो बड़े आरोप
TMC की ओर से आरोप लगाया गया था कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए। पार्टी ने इसे “वोटर डिलीशन” का मामला बताया था। इसके अलावा TMC ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और बिहार से “फर्जी वोटर्स” जोड़कर BJP को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
अमित मालवीय ने आंकड़ों के जरिए किया पलटवार
अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान जिन पांच सीटों पर सबसे ज्यादा “अयोग्य मतदाताओं” के नाम हटाए गए, वे सभी सीटें TMC ने जीतीं। उन्होंने कहा कि अगर वोटर डिलीशन से BJP को फायदा होता, तो इन सीटों पर BJP की जीत होनी चाहिए थी। उन्होंने आगे कहा कि जिन सीटों पर सबसे कम वोटर डिलीशन हुआ, वहां BJP को जीत मिली। मालवीय ने इसे TMC के दावों के खिलाफ “सबसे बड़ा सबूत” बताया।
फर्जी वोटर आरोप पर भी BJP का जवाब
BJP नेता ने TMC के दूसरे आरोप पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन पांच सीटों पर सबसे ज्यादा नए वोटर जोड़े गए, उनमें चार सीटें TMC और एक सीट कांग्रेस के खाते में गई। मालवीय के मुताबिक, अगर बाहरी राज्यों के वोटरों को जोड़कर BJP को फायदा पहुंचाया गया होता, तो इन सीटों पर BJP को जीत मिलती। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन सीटों पर सबसे कम वोटर जुड़े, वहां BJP ने जीत दर्ज की।
27 लाख वोट जोड़ने पर भी BJP आगे
अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि अगर 27 लाख “अजुडिकेशन केस” वाले वोटरों को दोबारा जोड़ भी दिया जाए और यह मान लिया जाए कि सभी वोट TMC को मिलेंगे, तब भी सीटवार विश्लेषण में BJP 181 सीटों पर आगे रहती है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि पश्चिम बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी और TMC को नकार दिया है।
बंगाल की राजनीति में फिर गरमाया चुनावी मुद्दा
अमित मालवीय की इस पोस्ट के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। BJP और TMC के बीच वोटर लिस्ट, चुनावी आंकड़ों और बाहरी वोटरों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज होते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।