पश्चिम बंगाल: में दुर्गा पूजा के दौरान वामपंथी दलों द्वारा लगाए जाने वाले पारंपरिक बुक स्टॉल्स (Book Stalls) को लेकर राज्य भर में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। कोलकाता के ढाकुरिया में स्टॉल लगाने के दौरान सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के नेताओं पर हमले और उत्तर 24 परगना के डनलप, नैहाटी, बनगांव और जेसोर रोड पर पुलिस की ओर से अनुमति न मिलने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस बीच, अनुमति विवाद को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस से 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। वहीं, सीपीएम ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर गुरुवार को सुनवाई तय है।
ढाकुरिया में बुक स्टॉल लगाने के दौरान हमला, नेता घायल
कोलकाता के ढाकुरिया बस स्टैंड के पास उस समय गंभीर स्थिति बन गई, जब लगभग चार दशकों से लग रहे वामपंथी साहित्य के बुक स्टॉल को तैयार किया जा रहा था। सीपीआई(एमएल) लिबरेशन का आरोप है कि स्टॉल निर्माण के दौरान कथित तौर पर भाजपा से जुड़े उपद्रवियों ने वहां आकर बाधा डाली। आरोप के अनुसार, सीपीआई(एमएल) लिबरेशन की राज्य कमेटी के सदस्य और जादवपुर-ढाकुरिया लोकल कमेटी के सचिव बाबुन चट्टोपाध्याय और वरिष्ठ वामपंथी नेता अमलेंदु भूषण चौधरी सहित अन्य कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट की गई। हमले में बाबुन चट्टोपाध्याय की आंख में गंभीर चोट आई है और घायलों का बाघाजतिन अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराया गया है।
डनलप में पुलिस की अनुमति न मिलने पर गतिरोध
बरानगर के डनलप ब्रिज के पास अस्थायी प्रगातिशील साहित्य केंद्र लगाने को लेकर भी पुलिस पर असहयोग का आरोप लगा है। सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने 24 सितंबर से ही थाने के निर्देशानुसार पीडब्ल्यूडी (PWD), बरानगर नगरपालिका और बैरकपुर ट्रैफिक गार्ड को आधिकारिक आवेदन सौंपे थे। आरोप है कि 5 अक्टूबर को बरानगर थाने से टालमटोल की गई और बुधवार को थाने के आईसी ने बिना कोई आधिकारिक कारण बताए स्टॉल लगाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। संगठन का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के कारण उनके स्टॉल को रोका जा रहा है।
बेहाला और कांचरापाड़ा में भी स्टॉल्स पर हमले के आरोप
दुर्गा पूजा के माहौल में वैचारिक साहित्य के प्रचार को लेकर सिर्फ ढाकुरिया या डनलप ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य इलाकों से भी बाधा और हमलों की शिकायतें दर्ज हुई हैं। दक्षिण 24 परगना के बेहाला में सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया यानी एसयूसीआई (SUCI) के स्टॉल और उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के बुक स्टॉल पर भी कथित तौर पर हमले और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। वामपंथी संगठनों ने इसे राज्य में लोकतांत्रिक और प्रगतिशील स्पेस पर सीधा प्रहार बताया है।
कलकत्ता हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: "गुब्बारा-बंदूक के स्टॉल लग सकते हैं तो किताबों के क्यों नहीं?"
नैहाटी, बनगांव और जेसोर रोड पर सीपीएम के बुक स्टॉल को पुलिस द्वारा रोके जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने प्रशासन की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि यदि पूजा के दौरान मेलों में गुब्बारे और खिलौना बंदूक के स्टॉल लग सकते हैं, तो फिर किताबों के स्टॉल लगाने में क्या दिक्कत है? अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि क्या स्टॉल की अनुमति देने में चयनात्मक (selective) रवैया अपनाया जा रहा है?
अदालत ने 24 घंटे के भीतर पुलिस से तलब की लिखित रिपोर्ट
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह अगले 24 घंटे के भीतर अदालत में लिखित रिपोर्ट दाखिल करे। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि जेसोर रोड और आसपास के क्षेत्रों में पूजा के दिनों में किन-किन संस्थाओं या व्यक्तियों को अस्थायी स्टॉल लगाने की अनुमति दी गई है, उसकी पूरी सूची और जांच रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश की जाए। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि दशकों से इन जगहों पर वामपंथी दल स्टॉल लगाते आए हैं, लेकिन इस बार उन्हें रोककर एक अन्य संगठन को वहां अस्थायी ढांचा खड़ा करने की अनुमति दी गई।
चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में पहुंचा मामला, आज सुनवाई
एकल पीठ के रुख के साथ ही सीपीएम नेतृत्व ने बुक स्टॉल को अनुमति न दिए जाने के पूरे प्रशासनिक गतिरोध को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की खंडपीठ का रुख किया है। पार्टी का कहना है कि पूजा के समय प्रगतिशील साहित्य और वैचारिक संवाद की परंपरा को पुलिस और राजनीतिक मिलीभगत से दबाया नहीं जा सकता। मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में इस महत्वपूर्ण मामले पर गुरुवार को सुनवाई होनी है, जिस पर पूरे राज्य की राजनीतिक और सामाजिक नजरें टिकी हुई हैं।