कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के समय शुरू की गई दो और प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम बदलने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को नबन्ना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि कन्याश्री योजना का नया नाम कन्यारत्न योजना और सबुज साथी योजना का नया नाम सारथी योजना होगा। इससे पहले सरकार लक्ष्मी भंडार का नाम बदलकर अन्नपूर्णा योजना और युवासाथी का नाम युवाशक्ति कर चुकी है। सरकार का कहना है कि योजनाओं का उद्देश्य और लाभ पहले की तरह जारी रहेगा।
सिर्फ नाम बदले जाएंगे, सुविधाओं में नहीं होगी कोई कटौती
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं के नाम बदलने का असर लाभार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं पर नहीं पड़ेगा। सबुज साथी योजना के तहत छात्रों को पहले की तरह साइकिलें वितरित की जाएंगी। वहीं कन्यारत्न योजना के तहत भी पात्र छात्राओं को मिलने वाले आर्थिक लाभ जारी रहेंगे। सरकार का कहना है कि योजनाओं की पहचान बदलेगी, लेकिन उनका स्वरूप और उद्देश्य पहले जैसा ही रहेगा। इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।
14 अगस्त को अब मनाया जाएगा 'कन्यारत्न दिवस'
अब तक राज्य में 14 अगस्त को कन्याश्री दिवस के रूप में मनाया जाता था। सरकार ने घोषणा की है कि इस वर्ष से यह दिवस कन्यारत्न दिवस के नाम से मनाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव केवल नाम का है और छात्राओं के लिए संचालित कार्यक्रम तथा गतिविधियां पहले की तरह आयोजित की जाएंगी। सरकार इस अवसर पर विभिन्न जिलों में विशेष कार्यक्रम भी आयोजित कर सकती है।
कन्याश्री योजना ने बदली थी लाखों छात्राओं की जिंदगी
कन्याश्री योजना की शुरुआत वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की थी। इस योजना का उद्देश्य छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना, बाल विवाह पर रोक लगाना और उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना था। इस पहल को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली थी। योजना के जरिए लाखों छात्राओं को शिक्षा जारी रखने में मदद मिली और स्कूल छोड़ने की दर में कमी आने का दावा किया गया था।
पहले चरण से लेकर एकमुश्त अनुदान तक मिलती रही आर्थिक सहायता
योजना के तहत 13 से 18 वर्ष की आयु की पात्र छात्राओं को प्रतिवर्ष 1,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती थी। इसके बाद 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी अविवाहित छात्राओं को 25,000 रुपये का एकमुश्त अनुदान प्रदान किया जाता था। इसके अलावा उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं के लिए भी विशेष आर्थिक सहायता का प्रावधान रखा गया था। सरकार ने संकेत दिया है कि इन सभी लाभों को नए नाम के साथ भी जारी रखा जाएगा।
'सारथी' योजना के तहत जारी रहेगा साइकिल वितरण
पूर्व में सबुज साथी योजना के माध्यम से लाखों स्कूली छात्रों को मुफ्त साइकिलें उपलब्ध कराई गई थीं ताकि उन्हें स्कूल आने-जाने में सुविधा मिल सके। अब यही योजना सारथी नाम से संचालित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों को पहले की तरह साइकिलें देती रहेगी और योजना की मूल भावना में कोई बदलाव नहीं होगा। सरकार का दावा है कि इससे शिक्षा तक पहुंच को और मजबूत बनाया जाएगा।
जनकल्याणकारी योजनाएं रहेंगी जारी, बढ़ेगा लाभ
सरकार ने दोहराया कि सत्ता संभालने के बाद उसने यह वादा किया था कि जनता के हित में चल रही किसी भी कल्याणकारी योजना को बंद नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत सभी योजनाएं जारी रखी जा रही हैं। सरकार का कहना है कि जहां संभव होगा, वहां लाभ की राशि और सुविधाओं में भी बढ़ोतरी की जाएगी। फिलहाल केवल योजनाओं के नाम बदले जा रहे हैं, जबकि लाभार्थियों को मिलने वाली सुविधाएं पहले की तरह मिलती रहेंगी।