पश्चिम बंगाल में आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले नंदग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों के लिए राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच, पारंपरिक 'कौटो' (डिब्बा) संस्कृति से आगे बढ़ते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम ने डिजिटल दौर में चुनाव प्रचार और फंड जुटाने के लिए एक नया रास्ता अपनाया है। पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता और समर्थकों से चुनावी फंड के लिए आर्थिक सहायता देने की अपील की है, जिसके लिए ऑनलाइन पेमेंट का क्यूआर कोड भी जारी किया गया है।
लाल कोठियों से डिजिटल युग की ओर सीपीएम का कदम
वाम मोर्चे के जमाने से ही राजनीतिक गतिविधियों, चुनाव प्रचार या राहत कार्यों के लिए नेताओं द्वारा आम जनता के बीच 'कौटो' (फंड बॉक्स) लेकर घर-घर जाने की परंपरा रही है। समय के साथ तृणमूल कांग्रेस के दौर में भी इस तरह की तस्वीरें सामने आती रही हैं। हालांकि, डिजिटल क्रांति के इस दौर में अब सीपीएम ने अपने पारंपरिक तरीकों में बदलाव किया है और सोशल मीडिया के जरिए सीधे डिजिटल चंदा जुटाने पर जोर दिया है।
सोशल मीडिया पर क्यूआर कोड जारी कर मांगी मदद
आगामी उपचुनावों के मद्देनजर सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक संदेश जारी किया है। उन्होंने लिखा, "आगामी रेजीनगर और नंदग्राम विधानसभा उपचुनाव में प्रचार के लिए चुनावी फंड में अपनी क्षमतानुसार आर्थिक योगदान दें।" इस संदेश के साथ ही ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए एक क्यूआर कोड भी साझा किया गया है, ताकि समर्थक आसानी से डिजिटल माध्यम से पैसे दान कर सकें। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी ने इसी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए चंदा जुटाया था।
विरोधियों के तंज पर सीपीएम का पलटवार
डिजिटल माध्यम से पैसे जुटाने के इस तरीके को लेकर विरोधी दलों ने सीपीएम पर तंज कसना शुरू कर दिया है। विरोधियों का कहना है कि जो पार्टी कभी इंटरनेट और कंप्यूटर तकनीक के सख्त खिलाफ हुआ करती थी, आज वही पार्टी अपनी चुनावी नैया पार लगाने के लिए पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो गई है। दूसरी ओर, सीपीएम नेतृत्व ने इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि चुनाव के समय देश-विदेश और दूर-दराज इलाकों में रहने वाले कई शुभचिंतक पार्टी को आर्थिक मदद देना चाहते हैं, लेकिन दूरी के कारण वे संपर्क नहीं कर पाते। ऐसे लोगों की सुविधा के लिए ही क्यूआर कोड की व्यवस्था की गई है। पार्टी का यह भी तर्क है कि उनके पास इलेक्टोरल बॉन्ड का सहारा नहीं है, बल्कि वे हमेशा से आम जनता के सहयोग पर ही विश्वास करते आए हैं।