डायमंड हार्बर (दक्षिण 24 परगना): दक्षिण 24 परगना जिले के मथुरापुर थाना क्षेत्र में चार साल पहले हुए सनसनीखेज सिर कलम हत्याकांड में अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। डायमंड हार्बर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक (तृतीय) अदालत ने पत्नी के कथित प्रेमी की धारदार हथियार से सिर काटकर नृशंस हत्या करने के मामले में मृतक की प्रेमिका के पति समेत तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।
तालाब से मिला था सिर, खेत में पड़ा था धड़
यह दिल दहला देने वाली घटना 9 फरवरी 2022 को सामने आई थी, जब मथुरापुर थाना अंतर्गत सुबुद्धिपुर इलाके में एक अज्ञात व्यक्ति का बिना सिर वाला शव बरामद हुआ था। शव मिलने से इलाके में भारी सनसनी फैल गई थी। बाद में परिजनों ने मृतक की शिनाख्त हबीबुल्ला पाइक के रूप में की। पुलिस ने जब आसपास के इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया, तो घटनास्थल के पास स्थित एक तालाब से मृतक का कटा हुआ सिर बरामद किया गया था।
अवैध संबंध के शक में रची गई थी खौफनाक साजिश
मामले की जांच में जुटी पुलिस ने जब कॉल डिटेल्स और स्थानीय सूत्रों की कड़ियां जोड़ीं, तो अवैध संबंधों का मामला खुलकर सामने आया। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी अजगर लस्कर की पत्नी के साथ हबीबुल्ला पाइक का विवाहेतर संबंध था। जब अजगर को अपनी पत्नी के इस रिश्ते की भनक लगी, तो उसने हबीबुल्ला को रास्ते से हटाने के लिए अपने दो अन्य साथियों—अजहर लस्कर और रबीउल सरदार—के साथ मिलकर हत्या की पूरी साजिश रची। योजना के तहत धारदार हथियार से हबीबुल्ला का सिर धड़ से अलग कर दिया गया और साक्ष्य छुपाने के इरादे से सिर को पास के तालाब में फेंक दिया गया।
24 गवाहों की गवाही और साक्ष्यों ने आरोपियों को पहुंचाया सलाखों के पीछे
वारदात के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य मिटाना) और 34 (साझा मंशा) के तहत मामला दर्ज कर अजगर लस्कर, अजहर लस्कर और रबीउल सरदार को गिरफ्तार कर लिया था। तत्कालीन जांच अधिकारी प्रसेनजीत जाना और वर्तमान जांच अधिकारी अभिषेक चक्रवर्ती ने अदालत में 24 गवाहों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट और महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य पेश किए, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला बेहद मजबूत हुआ।
सरकारी वकील की दलीलें और अदालत का कड़ा फैसला
अदालत में मामले की पैरवी कर रहे सरकारी वकील विभास चट्टोपाध्याय ने सभी गवाहों के बयानों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के लिए सख्त से सख्त सजा की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने धारा 302 के तहत तीनों को आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही साक्ष्य छुपाने के जुर्म में धारा 201 के तहत 2-2 साल के अतिरिक्त सश्रम कारावास का आदेश भी दिया गया।
चार साल बाद पीड़ित परिवार को मिला न्याय
फैसला आने के बाद मृतक हबीबुल्ला पाइक के परिजनों ने राहत की सांस ली है। फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा चार साल के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर सजा सुनाए जाने को अभियोजन पक्ष और स्थानीय पुलिस की बड़ी कानूनी सफलता माना जा रहा है। इस फैसले से इलाके में कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।