कालना: पूर्वी बर्धमान जिले के कालना-2 ब्लॉक के बोरा धमास गांव में पंचायत कार्यालय से बड़ी संख्या में सरकारी दस्तावेज मिलने के बाद हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने कार्यालय के एक कमरे में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र, डिजिटल राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और नौकरी कार्ड समेत कई दस्तावेज देखे। सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने जब पंचायत कार्यालय में जाकर जानकारी जुटाई, तब यह मामला सामने आया। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
योजनाओं के लाभ से वंचित ग्रामीणों ने खोला मामला
ग्रामीणों के अनुसार, इलाके में कई लोग लंबे समय से सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच आवास योजना के लाभार्थियों की सूची को लेकर पंचायत कार्यालय में जानकारी लेने पहुंचे कुछ लोगों की नजर कमरे में रखे दस्तावेजों के ढेर पर पड़ी। जब उन्होंने दस्तावेजों को देखा तो उनमें कई तरह के सरकारी पहचान और प्रमाणपत्र शामिल थे। इसकी जानकारी धीरे-धीरे दूसरे ग्रामीणों तक भी पहुंच गई। इसके बाद पंचायत कार्यालय में लोगों की भीड़ जुटने लगी और पूरे मामले को लेकर सवाल उठने लगे।
कमरे को पुलिस ने किया सील
मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस पंचायत कार्यालय पहुंची और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। पुलिस ने कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों और संबंधित कमरे की भी जांच की। इसके बाद एहतियात के तौर पर उस कमरे को सील कर दिया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद ग्रामीणों की उम्मीद है कि बरामद दस्तावेजों की जांच से यह साफ हो सकेगा कि ये कागजात यहां इतने लंबे समय से क्यों रखे हुए थे। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों ने लगाया लापरवाही और अनियमितता का आरोप
दस्तावेज मिलने के बाद ग्रामीणों ने पंचायत के कामकाज को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि पंचायत में कथित अनियमितताओं के कारण कई लोगों को समय पर सरकारी सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाया। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि उनके जरूरी दस्तावेज बनने के बावजूद उन्हें लंबे समय तक उपलब्ध नहीं कराए गए। लोगों ने यह भी आशंका जताई कि बरामद कागजात में उनके परिवार के सदस्यों के दस्तावेज भी हो सकते हैं। इसी वजह से ग्रामीण मामले की गहराई से जांच की मांग कर रहे हैं।
पंचायत प्रधान ने दी दस्तावेजों पर सफाई
पंचायत प्रधान मुनमुन बाग ने बरामद दस्तावेजों को लेकर अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि कई प्रमाणपत्र और कार्ड में नाम या अन्य जानकारी की वर्तनी में गलती थी। कुछ दस्तावेजों के दोबारा बने होने की वजह से भी उनका वितरण नहीं किया जा सका। पंचायत प्रधान के मुताबिक, इन कारणों से कई दस्तावेज कार्यालय में ही रखे रह गए। हालांकि, ग्रामीण पंचायत प्रधान की इस सफाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और वे पूरे मामले की जांच चाहते हैं।
'15 साल से सरकारी सेवाओं का इंतजार'
कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि इलाके में ऐसे परिवार भी हैं जो 15 साल या उससे ज्यादा समय से जरूरी सरकारी सेवाओं का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर दस्तावेज तैयार होने के बाद भी उन्हें लोगों तक नहीं पहुंचाया गया, तो इसके पीछे की वजह सामने आनी चाहिए। लोगों को आशंका है कि बरामद दस्तावेजों में उनके लंबे समय से लंबित प्रमाणपत्र और कार्ड भी शामिल हो सकते हैं। अब ग्रामीण चाहते हैं कि सभी दस्तावेजों की पहचान कर उन्हें वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाया जाए।
पंचायत प्रधान ने फैसलों को लेकर उठाए सवाल
मुनमुन बाग ने अपने स्तर पर पंचायत के कामकाज को लेकर भी गंभीर बातें कही हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधान होने के बावजूद पंचायत के सभी फैसले उनके हाथ में नहीं हैं। उनका कहना है कि वह एक साधारण गृहिणी हैं और निर्वाचित होने के बाद प्रधान की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत के कई काम कालना-2 ब्लॉक के तृणमूल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रणब रॉय के निर्देश पर किए जाते हैं। प्रधान ने यह भी कहा कि उन्हें सरकारी कामकाज की पूरी जानकारी नहीं है और कई फैसले नेताओं के निर्देश पर ही लिए जाते हैं।
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
पंचायत कार्यालय से इतने बड़े पैमाने पर सरकारी दस्तावेज मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये दस्तावेज कार्यालय में क्यों रखे गए थे और इन्हें संबंधित लोगों तक क्यों नहीं पहुंचाया गया। पुलिस ने कमरे को सील कर दिया है, ऐसे में जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। अगर जांच में किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है।