कोलकाता: कोलकाता नगर निगम (KMC) चुनाव 2026 से पहले वार्डों के पुनर्गठन का प्रस्ताव सामने आया है। प्रस्तावित सूची में शहर की विभिन्न विधानसभा सीटों के अंतर्गत आने वाले वार्डों की संख्या में बदलाव का खाका तैयार किया गया है। इस पुनर्गठन का उद्देश्य प्रत्येक वार्ड में मतदाताओं की संख्या को अधिक संतुलित बनाना बताया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई विधानसभा क्षेत्रों में वार्डों की संख्या बढ़ेगी, जबकि कुछ क्षेत्रों में कमी भी देखने को मिलेगी। इससे चुनावी रणनीति और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ने की संभावना है।

कसबा और जादवपुर में वार्डों की संख्या में बड़ा बदलाव
प्रस्ताव के अनुसार कसबा विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा 6 वार्डों की जगह 17 प्रस्तावित वार्ड होंगे। यहां कुल 2,65,616 मतदाता हैं और प्रत्येक वार्ड में औसतन 15,624 मतदाता होंगे। वहीं जादवपुर विधानसभा में 10 मौजूदा वार्डों की जगह 16 वार्ड प्रस्तावित किए गए हैं। इस क्षेत्र में कुल 2,55,508 मतदाता हैं और प्रति वार्ड औसतन 15,969 मतदाता होंगे। दोनों क्षेत्रों में वार्डों की संख्या बढ़ने से स्थानीय प्रतिनिधित्व का स्वरूप बदल सकता है।
बेहाला, टॉलीगंज और पोर्ट इलाके में भी पुनर्गठन
टॉलीगंज विधानसभा में 14 प्रस्तावित वार्ड होंगे, जबकि बेहाला पूर्व में 16 और बेहाला पश्चिम में 17 वार्ड प्रस्तावित किए गए हैं। मेटियाब्रुज में 8, कोलकाता पोर्ट में 11, भवानीपुर और रासबिहारी में 10-10 वार्डों का प्रस्ताव रखा गया है। इन क्षेत्रों में प्रति वार्ड औसतन 15 से 16 हजार मतदाता रखने की योजना बनाई गई है ताकि सभी वार्डों में मतदाताओं का संतुलन बना रहे।
उत्तर कोलकाता की कई सीटों में भी बदलाव
बेलगाछिया, माणिकतला, श्यामपुकुर, जोरासांको, बेलीघाटा, एंटाली और चौरंगी समेत उत्तर कोलकाता की कई विधानसभा सीटों में भी वार्डों के पुनर्गठन का प्रस्ताव दिया गया है। चौरंगी और जोरासांको में 8-8 वार्ड प्रस्तावित हैं, जबकि एंटाली, माणिकतला और काशीपुर-बेलगाछिया में 11-11 वार्ड रखने की योजना है। इन क्षेत्रों में भी प्रति वार्ड औसतन करीब 15 से 16 हजार मतदाता रखने का लक्ष्य तय किया गया है।
समान मतदाता संख्या पर रहेगा जोर
प्रस्तावित सूची के अनुसार लगभग सभी वार्डों में औसतन 15,000 से 16,500 मतदाता रखने की कोशिश की गई है। इससे वार्डों के बीच मतदाता संख्या का अंतर कम होगा और प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होने की उम्मीद है। हालांकि, यह अभी प्रस्तावित सूची है और अंतिम मंजूरी के बाद ही नई वार्ड संरचना लागू होगी। KMC चुनाव 2026 से पहले इस पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक दलों और स्थानीय नागरिकों की नजरें बनी हुई हैं।