लखनऊ - संसद के मानसून सत्र के दौरान अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने विरोध-प्रदर्शन कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई, जबकि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इसे राजनीतिक नौटंकी बताते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला।
केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दल राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं को आहत करने का प्रयास कर रहे हैं। मौर्य ने कहा कि अयोध्या में चढ़ावे से जुड़े मामले में कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
मौर्य ने विपक्ष के प्रदर्शन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि धार्मिक प्रतीकों और भगवा वस्त्रों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध के लिए करना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की भी मांग की।
गिरिराज सिंह ने भी जताई कड़ी आपत्ति
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी विपक्ष के प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का जिस तरह उपयोग किया गया, वह अनुचित है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
विपक्ष ने उठाई पारदर्शिता और जांच की मांग
दूसरी ओर, विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चंदे में कथित अनियमितताओं के मामले में निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की। संसद परिसर में हुए प्रदर्शन के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में दिखाई दिए। प्रदर्शन के दौरान प्रतीकात्मक रूप से एक दानपेटी भी रखी गई, जिसमें विपक्ष के कुछ नेताओं ने दान डालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
पप्पू यादव ने उठाए कई सवाल
प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने कहा कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के साथ मंदिर निर्माण के लिए सहयोग दिया था, इसलिए पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं तो मामले की विस्तृत जांच स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक निगरानी में क्यों नहीं कराई जाती। उन्होंने पूरे मामले में जवाबदेही तय करने और सभी संबंधित पक्षों की जांच की मांग की।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर नजर
राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर एक ओर सत्ता पक्ष विपक्ष के विरोध को धार्मिक भावनाओं से जोड़ रहा है, वहीं विपक्ष पूरे मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।