भिवंडी (महाराष्ट्र) - महाराष्ट्र के भिवंडी में गुरुवार देर रात बड़ा हादसा हो गया, जब बालाजी नगर-गंगारामवाड़ी स्थित कोहिनूर अपार्टमेंट नाम की ग्राउंड प्लस चार मंजिला जर्जर इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मलबे में 5 से 6 लोगों के फंसे होने की आशंका है, जबकि अब तक दो लोगों के शव बाहर निकाले जा चुके हैं। कई अन्य लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
संकरी गलियों ने बढ़ाई रेस्क्यू की चुनौती
हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस, महानगरपालिका की आपदा प्रबंधन टीम, NDRF और TDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। हालांकि घटनास्थल तक पहुंचने में संकरी गलियों और रास्ते में मौजूद एक पुरानी चॉल के कारण शुरुआती दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बचाव दल ने जेसीबी की मदद से रास्ता साफ किया, जिसके बाद मलबे तक पहुंचकर युद्धस्तर पर राहत अभियान शुरू किया गया। मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए आधुनिक उपकरणों और मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
शाम से दिखने लगी थीं दरारें, खाली कराया जा रहा था भवन
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक गुरुवार शाम करीब 6 बजे इमारत में दरारें दिखाई देने लगी थीं। कुछ ही देर बाद भवन के झुकने की सूचना मिलने पर प्रभाग समिति के अधिकारी मौके पर पहुंचे और इमारत खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसी दौरान कुछ निवासी अपना सामान निकालने के लिए अंदर मौजूद थे, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर पिलरों की मरम्मत का काम भी चल रहा था। इसी बीच अचानक पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
पहले ही 'खतरनाक' घोषित हो चुकी थी इमारत
महानगरपालिका ने इस इमारत को पहले ही खतरनाक भवन घोषित कर नोटिस जारी किया था। जानकारी के अनुसार भवन की संरचना लंबे समय से कमजोर मानी जा रही थी और ग्राउंड फ्लोर के पिलरों की मरम्मत भी इसी कारण कराई जा रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत की हालत काफी खराब थी, लेकिन कुछ परिवार अब भी वहां रह रहे थे। प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि खतरनाक घोषित किए जाने के बावजूद भवन पूरी तरह खाली क्यों नहीं कराया गया।
परिवार की बेटी ने दिखाई हिम्मत, खुद निकली मलबे से बाहर
हादसे के दौरान इमारत में रहने वाले अरविंद गुप्ता और उनकी पत्नी किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन उनकी बेटी कोमल मलबे में फंस गई। काफी देर तक संघर्ष करने के बाद कोमल खुद ही मलबे से बाहर निकल आई।उसने बताया कि पिलरों की मरम्मत का काम चल रहा था और अचानक तेज आवाज के साथ पूरी इमारत गिर गई। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय युवकों ने भी बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी व्यवस्था
महानगरपालिका का कहना है कि प्रभावित परिवारों के लिए नजदीकी स्कूलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को जल्द से जल्द उपचार उपलब्ध कराना है।
हादसे की जांच भी होगी
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। इसमें भवन की निर्माण गुणवत्ता, मरम्मत कार्य और सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा की जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।