देवघर। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही झारखंड की बाबा नगरी देवघर एक बार फिर शिवभक्ति के रंग में रंग गई है। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 की शुरुआत हो चुकी है और अगले एक महीने तक यहां देशभर से आने वाले लाखों कांवड़ियों की आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाले इस मेले में श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर 108 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक करेंगे। दुम्मा सीमा से वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। इसके बाद केसरिया वस्त्रों में सजे कांवड़ियों के जत्थे "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष के बीच बाबाधाम की ओर बढ़ते दिखाई दिए।
12 ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ का अद्भुत संगम
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में स्थान प्राप्त है और यह प्रमुख शक्तिपीठों में भी शामिल माना जाता है। यही कारण है कि पूरे वर्ष यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन सावन में भक्तों की संख्या करोड़ों तक पहुंच जाती है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में बाबा बैद्यनाथ पर गंगाजल अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
108 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा, आस्था का अनोखा उदाहरण
श्रावणी मेले की सबसे बड़ी पहचान सुल्तानगंज से देवघर तक 108 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा है। श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर नंगे पैर यह दूरी तय करते हैं। इस यात्रा के दौरान कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता और पूरी यात्रा धार्मिक नियमों के अनुसार पूरी की जाती है। देवघर पहुंचने के बाद श्रद्धालु पहले शिवगंगा में स्नान करते हैं और फिर लंबी कतारों में खड़े होकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
इस बार स्पर्श पूजा पर रोक, अरघा से होगा जलाभिषेक
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने इस वर्ष विशेष व्यवस्था लागू की है। पूरे श्रावणी मेले के दौरान गर्भगृह में स्पर्श पूजा पर रोक रहेगी। श्रद्धालु केवल अरघा के माध्यम से ही जल अर्पित कर सकेंगे। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से दर्शन अधिक व्यवस्थित होंगे और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी।
VIP दर्शन महंगे, रविवार और सोमवार को सुविधा बंद
जो श्रद्धालु शीघ्र दर्शन करना चाहते हैं, उनके लिए VIP दर्शन (शीघ्रदर्शनम) की शुल्क राशि 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये कर दी गई है। हालांकि, अत्यधिक भीड़ को देखते हुए रविवार और सोमवार को VIP दर्शन सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी।
मोबाइल पर रोक, AI से होगी 24 घंटे निगरानी
- इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक आधुनिक बनाई गई है।
- मंदिर परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
- 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
- 100 से ज्यादा अस्थायी पुलिस चौकियां बनाई गई हैं।
- AI आधारित इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से पूरे मेला क्षेत्र की 24 घंटे निगरानी की जाएगी।
- प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन कराना है।
श्रद्धालुओं के लिए हाईटेक सुविधाएं
दुम्मा बॉर्डर से लेकर मंदिर तक श्रद्धालुओं के लिए कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
इनमें शामिल हैं—
- जर्मन हैंगर शेड
- बड़े पंखे
- निशुल्क पेयजल
- 24 घंटे चिकित्सा शिविर
- स्नानघर
- आधुनिक टेंट सिटी
- विश्राम स्थल
- इसके अलावा इस बार पूरे मेले को 'नो प्लास्टिक जोन' बनाने का भी लक्ष्य रखा गया है।
रात होते ही रोशनी से जगमगाता है देवघर
श्रावणी मेले के स्वागत में देवघर शहर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। रेलवे स्टेशन, टावर चौक, शिवराम झा चौक सहित प्रमुख मार्गों और सरकारी भवनों पर रंग-बिरंगी LED लाइटें लगाई गई हैं। शाम ढलते ही पूरी बाबा नगरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भव्यता का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है, जो देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।
आस्था और आधुनिक व्यवस्था का अनूठा संगम
श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इस वर्ष प्रशासन ने हाईटेक सुरक्षा, बेहतर यातायात व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं के जरिए श्रद्धालुओं की यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया है।
Key Highlights
- 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगा विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला।
- सुल्तानगंज से देवघर तक 108 किमी पैदल कांवड़ यात्रा।
- स्पर्श पूजा पर रोक, अरघा से होगा जलाभिषेक।
- VIP दर्शन शुल्क बढ़कर ₹600 हुआ।
- रविवार और सोमवार को VIP दर्शन बंद रहेंगे।
- 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी और AI आधारित निगरानी व्यवस्था।
- देवघर को 'नो प्लास्टिक जोन' बनाने का अभियान।
FAQ
Q1. श्रावणी मेला 2026 कब तक चलेगा?
30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक।
Q2. कांवड़ यात्रा कितनी लंबी होती है?
सुल्तानगंज से देवघर तक लगभग 108 किलोमीटर।
Q3. क्या इस बार स्पर्श पूजा होगी?
नहीं। पूरे श्रावणी मेले के दौरान स्पर्श पूजा पर रोक है। श्रद्धालु अरघा के माध्यम से जल अर्पित करेंगे।
Q4. VIP दर्शन का शुल्क कितना है?
इस वर्ष शुल्क बढ़ाकर 600 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया गया है।
Q5. सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं?
11,500 से अधिक पुलिसकर्मी, 100 से ज्यादा अस्थायी चौकियां, AI आधारित निगरानी, कंट्रोल रूम और व्यापक चिकित्सा एवं पेयजल व्यवस्था की गई है।