नई दिल्ली। सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की वैश्विक उपलब्धता को मजबूत बनाने की दिशा में भारत ने एक अहम पहल की है। नई दिल्ली में आयोजित 'फर्स्ट ग्लोबल ड्रग रेगुलेटरी कॉन्क्लेव 2026' के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि बदलती स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच ऐसा नियामक तंत्र जरूरी है, जो विज्ञान पर आधारित, पारदर्शी और भरोसेमंद हो। उन्होंने कहा कि भारत केवल दवाओं का बड़ा उत्पादक ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि दवा सुरक्षा, गुणवत्ता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए देशों के बीच सहयोग और वैज्ञानिक साझेदारी को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
दवा सुरक्षा और गुणवत्ता पर दुनिया के विशेषज्ञ एक मंच पर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के दवा नियामक संस्थानों, नीति निर्माताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर दवाओं और मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा तथा नियामक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए साझा रणनीति तैयार करना है। इस मंच के जरिए अलग-अलग देशों के अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
'दुनिया की फार्मेसी' के रूप में भारत की भूमिका
जेपी नड्डा ने कहा कि भारत आज दुनिया के कई देशों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि देश का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जो मरीजों तक सुरक्षित और प्रभावी दवाएं समय पर पहुंचाने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि एक मजबूत नियामक व्यवस्था सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के साथ-साथ अनुसंधान और नवाचार को भी गति देती है।
भविष्य के लिए तैयार होगा रेगुलेटरी सिस्टम
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, सरकार डिजिटल तकनीक, गुणवत्ता मानकों और नियामक सुधारों के जरिए भारत के दवा नियामक तंत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नई स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए नियामक संस्थानों को भी आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा।
वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर जोर
अपने संबोधन में जेपी नड्डा ने कहा कि आज स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। ऐसे में सूचना साझा करना, वैज्ञानिक सहयोग, क्षमता निर्माण और नियामक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही दुनिया भर में लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
स्वास्थ्य सचिव ने रखा भारत का विजन
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और नई तकनीकों के साथ नियामक ढांचे को भी लगातार विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक रेगुलेटरी प्रणाली का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को भी प्रोत्साहित करना होना चाहिए।
डिजिटल बदलाव और क्षमता निर्माण पर फोकस
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि भारत अपनी नियामक प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत बनाने के लिए डिजिटल परिवर्तन, पारदर्शिता और संस्थागत क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैश्विक साझेदारी के जरिए दवा सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
क्यों अहम है यह सम्मेलन?
विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं का उत्पादन और आपूर्ति अब वैश्विक स्तर पर जुड़ी हुई प्रक्रिया बन चुकी है। ऐसे में विभिन्न देशों के नियामक तंत्र के बीच बेहतर तालमेल, साझा मानक और वैज्ञानिक सहयोग भविष्य में सुरक्षित दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
Key Highlights
- नई दिल्ली में 'फर्स्ट ग्लोबल ड्रग रेगुलेटरी कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन।
- जेपी नड्डा ने विज्ञान आधारित और पारदर्शी रेगुलेटरी सिस्टम पर जोर दिया।
- भारत ने वैश्विक दवा सुरक्षा और गुणवत्ता में सहयोग बढ़ाने की वकालत की।
- डिजिटल बदलाव और नियामक सुधारों के जरिए भविष्य के लिए तैयार सिस्टम बनाने पर फोकस।
- स्वास्थ्य सचिव ने वैज्ञानिक सहयोग और वैश्विक समन्वय को समय की जरूरत बताया।
FAQ
Q1. फर्स्ट ग्लोबल ड्रग रेगुलेटरी कॉन्क्लेव 2026 का उद्देश्य क्या है?
दवा और मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा, गुणवत्ता तथा नियामक सहयोग को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना।
Q2. जेपी नड्डा ने सम्मेलन में क्या कहा?
उन्होंने भरोसेमंद, विज्ञान-आधारित और पारदर्शी रेगुलेटरी सिस्टम की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि भारत वैश्विक दवा आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
Q3. भारत किस दिशा में काम कर रहा है?
भारत डिजिटल तकनीक, नियामक सुधार और गुणवत्ता मानकों के जरिए भविष्य के अनुरूप दवा नियामक व्यवस्था विकसित कर रहा है।
Q4. स्वास्थ्य सचिव ने किस बात पर बल दिया?
उन्होंने कहा कि नियामक व्यवस्था को नई तकनीकों के साथ विकसित करना होगा और वैश्विक सहयोग, वैज्ञानिक उत्कृष्टता तथा पारदर्शिता को बढ़ावा देना जरूरी है।