नई दिल्ली। भारत के महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह के बलिदान दिवस पर पूरे देश ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उधर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी शहीद उधम सिंह को नमन करते हुए उनके सपनों के अनुरूप मजबूत, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने संदेश में लिखा कि महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह का बलिदान भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि उनकी वीरता और अदम्य साहस आने वाली पीढ़ियों को देश के सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को राष्ट्र के लिए अविस्मरणीय बताया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी किया नमन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संदेश में कहा कि शहीद उधम सिंह का बलिदान देशभक्ति, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के अनुरूप समरस, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जलियांवाला बाग हत्याकांड का लिया था प्रतिशोध
शहीद उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब में हुआ था। वर्ष 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इस घटना में सैकड़ों निहत्थे भारतीयों की मौत ने उन्हें गहराई से झकझोर दिया और उन्होंने इस अन्याय का प्रतिशोध लेने का संकल्प लिया। करीब दो दशक बाद, 13 मार्च 1940 को उन्होंने लंदन के कैक्सटन हॉल में ब्रिटिश प्रशासन के पूर्व पंजाब लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ'डायर पर गोली चलाकर उसकी हत्या कर दी। ओ'डायर को उस दौर की दमनकारी नीतियों का प्रमुख समर्थक माना जाता था।
गिरफ्तारी के बाद भी नहीं जताया पछतावा
घटना के बाद उधम सिंह को गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि उनका कदम जलियांवाला बाग के निर्दोष शहीदों के लिए न्याय की भावना से प्रेरित था। उनकी यह दृढ़ता आज भी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में साहस और संकल्प के प्रतीक के रूप में याद की जाती है।
31 जुलाई 1940 को दी गई थी फांसी
ब्रिटिश सरकार ने मुकदमे के बाद 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में उधम सिंह को फांसी दे दी। उस समय उनकी उम्र लगभग 40 वर्ष थी। बाद में 1974 में उनके पार्थिव अवशेष भारत लाए गए, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
आज भी क्यों याद किए जाते हैं शहीद उधम सिंह?
शहीद उधम सिंह का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन महान सेनानियों में लिया जाता है, जिन्होंने व्यक्तिगत जीवन से ऊपर उठकर देश के सम्मान को सर्वोच्च माना। उनका बलिदान केवल प्रतिशोध की कहानी नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष और राष्ट्र के स्वाभिमान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
Key Highlights
- शहीद उधम सिंह के बलिदान दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि दी।
- पीएम ने कहा कि उनकी वीरता हर पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी।
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी उन्हें नमन किया।
- उधम सिंह ने 1940 में माइकल ओ'डायर की हत्या कर जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रतिशोध लिया था।
- 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में उन्हें फांसी दी गई थी।
FAQ
Q1. शहीद उधम सिंह का बलिदान दिवस कब मनाया जाता है?
हर वर्ष 31 जुलाई को शहीद उधम सिंह का बलिदान दिवस मनाया जाता है।
Q2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि शहीद उधम सिंह की जीवनगाथा देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
Q3. उधम सिंह ने माइकल ओ'डायर की हत्या क्यों की थी?
उन्होंने 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के प्रतिशोध के रूप में 13 मार्च 1940 को माइकल ओ'डायर की हत्या की थी।
Q4. उधम सिंह को फांसी कब दी गई थी?
उन्हें 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में फांसी दी गई थी।