नई दिल्ली - राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने पेपर लीक को देश की परीक्षा व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए इसे "कैंसर जैसी गंभीर बीमारी" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल बयानबाजी या अस्थायी कदमों से नहीं, बल्कि मजबूत और स्थायी संस्थागत व्यवस्था से ही संभव है। चड्ढा ने कहा कि नया कानून इसी दिशा में एक अहम प्रयास है और इसका उद्देश्य परीक्षा माफियाओं पर निर्णायक कार्रवाई करना है।
'क्रोसिन से कैंसर का इलाज नहीं होता'
अपने संबोधन में राघव चड्ढा ने कहा कि जिस तरह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज सिर्फ दर्द निवारक दवा देकर नहीं किया जा सकता, उसी तरह पेपर लीक जैसी संगठित समस्या का समाधान केवल मीडिया बाइट्स या तात्कालिक फैसलों से नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचे की जरूरत थी, जिसे यह विधेयक उपलब्ध कराता है।
'छात्रों का गुस्सा और दर्द पूरी तरह जायज'
राघव चड्ढा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका गुस्सा, चिंता और पीड़ा पूरी तरह वाजिब है। उन्होंने कहा कि जब कोई छात्र NEET जैसी परीक्षा की तैयारी करता है, तो केवल वही नहीं बल्कि उसका पूरा परिवार इस संघर्ष में शामिल होता है। माता-पिता अपनी बचत खर्च करते हैं, कई परिवार कर्ज तक लेते हैं ताकि बच्चों का भविष्य बेहतर बन सके। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के सपनों पर चोट करती हैं।
सरकार के कदमों का किया जिक्र
चर्चा के दौरान चड्ढा ने कहा कि छात्रों की आवाज उठने के बाद सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। उन्होंने बताया कि पेपर लीक के बाद दोबारा परीक्षा कराई गई, जांच CBI को सौंपी गई, विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया और मुख्य आरोपियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि जांच को लंबा नहीं खींचा गया बल्कि तेजी से चार्जशीट दाखिल की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में बदलाव किए गए हैं, परीक्षा सुरक्षा प्रोटोकॉल मजबूत किए जा रहे हैं और भविष्य में कई परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित प्रणाली से कराने की तैयारी है। साथ ही परीक्षा सुधारों के लिए विशेषज्ञों की हाई पावर टास्क फोर्स भी बनाई गई है।
'पेपर लीक करने से पहले अपराधियों की रूह कांप जाएगी'
राघव चड्ढा ने कहा कि नए कानून में ऐसे कड़े प्रावधान किए गए हैं कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति पेपर लीक करने से पहले कई बार सोचेगा। उन्होंने कहा कि अब इस अपराध को किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि संगठित अपराध माना जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी पेपर लीक मामले में कोचिंग माफिया, प्रिंटिंग प्रेस, लॉजिस्टिक कंपनियां, सॉल्वर गैंग, परीक्षा अधिकारी या अंदरूनी कर्मचारी शामिल पाए जाते हैं, तो सभी के खिलाफ समान रूप से कठोर कार्रवाई की जाएगी।
10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान
चड्ढा ने बताया कि नए कानून के तहत दोषियों को 10 वर्ष तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना था कि इस कानून का मकसद केवल सजा देना नहीं, बल्कि ऐसा डर पैदा करना है जिससे भविष्य में परीक्षा प्रणाली के साथ खिलवाड़ करने की कोई हिम्मत न कर सके।